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शिक्षा क्षेत्र में हिमाचल सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धियां

प्रदेश सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। राज्य ने गत चार वर्षों के दौरान राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में 15 हजार से अधिक शिक्षण संस्थानों का एक वृहद नेटवर्क है और प्रारंभिक शिक्षा में नामांकन शत-प्रतिशत है।
 वर्ष 1948 में प्रदेश में महज 52 माध्यमिक, 09 उच्च व एक महाविद्यालय था। वर्तमान में उच्चतर शिक्षा विभाग के अधीनस्थ 931 उच्च, 1718 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और 116 महाविद्यालय हैं, जिसमें 06 संस्कृत महाविद्यालय, 106 स्नात्तक महाविद्यालय, 01 फाईन आर्ट कॉलेज, 01 राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद सोलन तथा 01 राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय धर्मशाला में संचालित है।
सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर विकास के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2016-2017 में बजट बढ़कर 6013 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2012-13 की तुलना में वर्ष 2016-17 में उच्चतर शिक्षा में बजट प्रावधान में 84.15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
शिक्षा के घर-द्वार पर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16, में 479 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को उच्च विद्यालयों में स्तरोन्नत किया गया तथा 392 उच्च विद्यालयों को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्तरोन्नत किया गया। इन विद्यालयों को सुचारू रूप से चलाने के लिए केपल उच्च शिक्षा विभाग में ही विभिन्न श्रेणियों के 4511 पद सृजित किए गए।
सरकार ने उच्च शिक्षा को सहजता से उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अन्तर्गत वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में 38 नए महाविद्यालय खोले हैं और 4 महाविद्यालयों का अधिग्रहण किया गया तथा प्रत्येक महाविद्यालय के लिए प्रथम चरण में प्रति महाविद्यालय 5 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। इन महाविद्यालयों को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न श्रेणियों के 1177 पद सृजित किए गए।
वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में उच्चतर शिक्षा विभाग में 3418 नियुक्तियां की गई, जिसमें 233 सहायक प्रौफेसर व 2681 पीजीटी शामिल हैं। वर्तमान सरकार ने पिछले तीन वर्षों के कार्यकाल में 9517 शिक्षकों और गैर-शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान की है।
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उच्चतर शिक्षा विभाग में 2609 शिक्षकों व गैर-शिक्षकों की सेवाओं को नियमित किया गया।
सात वर्ष का सेवाकाल पूरा कर चुके पीटीए द्वारा उपलब्ध करवाए गए 1521 पीजीटी, 190 डीपीई और 61 सहायक प्रौफैसरों की सेवाओं को अनुबंध आधार पर लिया गया तथा 15 सहायक प्रौफेसर और 5 लिपिकों की सेवाओं का अधिग्रहण किया गया।
विद्यालयों से पठ्न-पाठन गतिविधियों को रोचक बनाने के लक्ष्य से शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश  स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला द्वारा संचालित 10वीं और 12वीं की परीक्षा में मेधावी छात्र-छात्राओं को ‘राजीव गांधी डिजिटल योजना’ के अन्तर्गत वर्ष 2015-16 के 10 हजार मेधावी छात्र-छात्राओं को भी लैपटॉप प्रदान किए जा रहे हैं, जिस पर 17,03,30,000 रुपये का व्यय किया गया है।
वर्तमान सरकार द्वारा प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पहली से 12वीं कक्षा के छात्रों को हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में घर से स्कूल आने तथा स्कूल से घर वापिस जाने के लिए निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जा रही है। यह सुविधा वर्ष 2015-16 से केन्द्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी प्रदान की जा रही है।
प्रदेश के सभी वर्गों के पात्र छात्र-छात्राओं को लाभान्वित करने के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं  संचालित की गई हैं। इस वर्ष विभिन्न छात्रवृतियों पर 213.21 करोड़ रुपये की राशि व्यय कर 4,14,480 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया।
वर्ष 2015-16 में 615 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं, 835 उच्च पाठशालाओं, 70 नव स्तरोन्नत वरिष्ठ माध्यमिक/ उच्च पाठशालाओं तथा 5 स्मार्ट स्कूलों में सूचना, संचार एवं प्रौद्योगिकी फेज-प्प् के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे वरिष्ठ माध्यमिक व माध्यमिक शिक्षा के विषयवस्तु कम्प्यूटरों से विद्यार्थियों के उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा, जो शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाएगा।
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा गहण करने वाले 10वीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को ‘महात्मा गांधी वर्दी योजना’ के अन्तर्गत मुफ्त वर्दियां प्रदान की जा रही हैं। वर्ष 2016-17 से कक्षा 11वीं व 12वीं के सभी विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री वर्दी योजना के अनतर्गत दो सैट प्रति विद्यार्थी मुफ्त वर्दियां प्रदान करके इस वर्ष लगभग 1,78,334 छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया जा रहा है।
प्रदेश में खेलां को बढ़ावा देने के लिए खंड स्तर, जिला स्तर, राज्य स्तर व राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। गत वर्ष प्रदेश स्तर पर आयोजित विभिन्न खेलां की प्रतियोगिताओं में चयनित 3862 खिलाड़ियों ने भाग लिया। राज्य स्तर पर विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयनित 353 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2015-16 में प्रदेश के जिला बिलासपुर के छात्र सुरेश कुमार ने राष्ट्रीय मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक हासिल किया। वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न खेलों में प्रदेश के छात्र छात्राओं ने एक स्वर्ण दो रजत और दस कांस्य पदक प्राप्त किए। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पंजगाई बिलासपुर के छात्र संजीत कुमार ने 74 किलोग्राम भार वर्ग कुश्ती में तुर्की में आयोजि ओलंपिक यूथ प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करके प्रदेश को गौरवान्वित किया।
वर्ष 2015-16 में एन.एस.एस. योजना प्रदेश के 716 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में कार्य कर रही है। गत वर्ष इस योजना के अन्तर्गत 70532 छात्र/छात्राओं का नामांकन किया गया। इसके अतिरिक्त, एन.एस.एस. स्वयं सेवकों द्वारा विभिन्न विद्यालयों में रक्तदान शिविर, सभी विद्यालयों में स्वच्छता अभियान, योग दिवस व जागरूकता रैलियां निकाल कर समय-समय पर समाज के लोगों को जागरूक किया।
‘भारत स्काउटस एवं गाईड योजना’ वर्ष 2015-16 में प्रदेश में 1509 विद्यालयों और 38 महाविद्यालयों में कार्य कर रही है। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष 2015-16 में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 26035 स्काउटस (छात्र) और 20429 गाईडस (छात्रा) को नामांकित किया गया है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश के 206 स्काउटस और गाईडस ने राष्ट्रीय स्तर की 25 गतिविधियों में भाग लिया। गत वर्ष 153 स्काउटस को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 से ‘मुख्यमंत्री शिक्षक सम्मान योजना’ आरम्भ करने की घोषणा की है। इस योजना के अन्तर्गत ऐसे अध्यापकों को पुरस्कार स्वरूप एक वर्ष का सेवा विस्तार प्रदान किया जाएगा जिनका गणित, विज्ञान तथा अंग्रेजी विषयों में बोर्ड परीक्षा परिणाम पिछले पांच वर्षों में शत-प्रतिशत रहा है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आदर्श विद्यालय योजना आरम्भ की है। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के 2 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं को आदर्श विद्यालय नामित करके उन विद्यालयों में पठन पाठन की हर प्रकार की अत्याधुनिक तकनीक व सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
वर्तमान राज्य सरकार के सतत् व ठोस प्रयासों के फलस्वरूप ही हिमाचल प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश के बड़े राज्यों की श्रेणी में श्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

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