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वर्तमान सरकार ने गद्दी कल्याण बोर्ड सदस्यों की संख्या 33 से बढ़ाकर 74 की

तीन करोड़ से नूरपुर में बनेगा जनजातीय भवन, 20 लाख जारी
एक सरकारी प्रवक्ता ने आज बताया कि राज्य की वर्तमान सरकार ने गद्दी समुदाय के उत्थान और उनके आर्थिक व सामाजिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए आम बजट के अतिरिक्त जनजातीय बजट से भी आवश्यक धन उपलब्ध करवाया है, ताकि विकास कार्यों को गति प्रदान की जा सके और समुदाय के लोगों को इसका समुचित लाभ प्राप्त हो सके।
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उन्होंने बताया कि विकास कार्यों का कार्यान्वयन और लाभ आम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से गद्दी कल्याण बोर्ड का व्यापक विस्तार किया गया है। सदस्यों की संख्या 33 से बढ़ाकर 74 कर दी गई है, ताकि सभी क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिल सके और उनकी समस्याओं का बोर्ड के माध्यम से समयबद्ध ढंग से समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
 गौरतलब है कि पूर्व सरकार ने सदस्यों की संख्या मात्र 28 से 33 तक की थी, परन्तु मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र ने इस संख्या को दोगुना से अधिक किया, जिससे गद्दी समुदाय के प्रत्येक क्षेत्र के लोग अपनी समस्याएं उनके समक्ष रख सकें और इस प्रकार उनका शीघ्र निपटान भी सम्भव हुआ।
पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा इस समुदाय के उत्थान पर 156.42 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं तथा इस वित्तीय वर्ष में 43.89 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
 गद्दी समुदाय का मुख्य व्यवसाय भेड़ व बकरी पालन है तथा इस व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से ऊन की खरीद दरों में सरकार द्वारा 20 प्रतिशत की बढ़ौतरी की गई, ताकि भेड़ पालकों को ऊन के उचित दाम मिल सकें।
 इसके अतिरिक्त, ऊन विकास प्रसंघ को प्रत्येक वर्ष हैंडलिंग चार्जिज के रूप में 15 प्रतिशत सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है।
राज्य सरकार ने इस समुदाय के लोगों की आवाजाही के दौरान उचित ठहराव के लिए चम्बा, सिहुन्ता और धर्मशाला के दाड़ी में जनजातीय भवनों का निर्माण किया है, जहां उन्हें रियायती दरों पर ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जा रही है।
सरकार द्वारा नूरपुर में 3 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय भवन बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए इस वित्तीय वर्ष में डेढ़ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है तथा इसके लिए 20 लाख रुपये की राशि लोक निर्माण विभाग को जारी कर दी गई है।
इस समुदाय के बेरोज़गार युवाओं को हस्तशिल्प एवं हथकरघा उद्योग में प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है और इस वर्ष इस कार्य पर 61 लाख रुपये व्यय किए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण के उपरान्त युवाओं को आवश्यक उपकरण भी निःशुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, ताकि वे स्वरोजगार का कार्य आरम्भ कर सकें और अपने तथा अपने परिवार के लिए सम्पन्नता के साधन सृजित कर सकें।

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