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रामपुर बुशहर के साथ मजाक, मिला झुनझुना, उठा भरोसा, जनता पीठ दिखाकर कार्यक्रम से भागी

रामपुर बुशहर को मिला झुनझुना, उठा भरोसा, जनता पीठ दिखाकर कार्यक्रम से भागी
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रामपुर बुशहर
राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में रामपुर बुशहर की जनता को उम्मीद के विपरीत झुनझुना ही मिला।

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समूचे क्षेत्र से हजारों की तादाद में कांग्रेस और आम जनता कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री वीरभद्र से मिलने इसी उम्मीद से पहुंची थी कि रामपुर बुशहर को जिला का दर्जा मिलेगा।
लेकिन जैसे कयास लगाए जा रहे थे कि सीएम वीरभद्र सिंह अपने 52 वर्षों के राजनीतिक जीवन को, जिसे बनाने में रामपुर बुशहर, कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और किन्नौर की जनता ने आँखे मूंदकर वीरभद्र को समर्थन दिया था, अब तो जिला का दर्जा देंगे लेकिन नहीं….!!!
राजनीति तो मुख्यमंत्री के चार चहेतों के इशारे पर ही घूम रही है। जनता की आवाज अनसुनी कर सिर्फ 4 लोगों के निर्देश मने जा रहे हैं।
न जिला बना न कोई औऱ घोषणा हुई…. तो लोग भी उनके सामने धूप में पसीना क्यों बहाते। सब निकल गए । उसमे रामपुर मंडल पदाधिकारियों से लेकर युवा, कांग्रेसी नेता और समर्थक सभी पीठ दिखाकर चले गए।
औऱ जाते जाते कह रहे थे कि अब चुनाव में आएं, कांग्रेस के नेता वोट मांगने तो फिर जनता घोषणा करेगी कि कौन जीतेगा….!!!
जाने वाले सब लोग कांग्रेस के कार्यकर्ता ही थे लेकिन अब वो किसके कार्यकर्ता और वोटर होंगे ये आने वाला वक्त बताएगा।
आखिर कहां कमी रह गयी रामपुर बुशहर और आसपास के लोगों के विश्वास और भरोसे में। या फिर कहाँ कमी रह गयी जब वे वीरभद्र सिंह और कांग्रेस के साथ किसी मौके पर खड़े न रहे हों। तो फिर रामपुर बुशहर के लोगों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों…?
जब से चुनाव शुरू हुए रामपुर बुशहर से मात्र एक बार कुछ समय के लिए भाजपा के प्रत्याशी को विधानसभा भेजा।
7 बार सिंघी राम, 2 बार नंद लाल और एक बार हरदयाल चौहान।…. फिर भी अपनी जनता से इतनी बेरुखी क्यों…? ये अब बुशहर की जनता को समझ आ रहा है।
किन्नौर से भी बड़ी संख्या में लोग आए थे लेकिन मुँह लटकाए मायूस चले गए।
यही सोच रहे थे कि शायद हमारे भाग्य में सिर्फ प्रजा बनकर रहना लिखा है। हैम।अपनी मांगें नहीं मानव सकते तो फिर क्यों ऐसे नेताओं का सहयोग दें।

जनता के कुछ नुमाइंदे इसमें न नुकर कर रहे हैं कि यह संभव नहीं है खर्च बहुत है और कांगड़ा के लोग नाराज हो जाएंगे।.???
तो फिर ठीक है अपनी प्रजा को नाराज कर आज तक कौन राजा फल फूल सका है।
और जनाब जब धर्मशाला में विधानसभा भवन बन सकता है, धर्मशाला में विधानसभा सत्र हर वर्ष चल सकता है। पात्रता न होने के बावजूद धर्मशाला को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया जा सकता है।
और सबसे बड़ी बात बिना मांग के लोगों के विरोध के बावजूद धर्मशाला को छोटे से हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाया जा सकता है तो फिर रामपुर बुशहर को जिला क्यों नहीं बनाया जा सकता…??????
इतना कुछ देण्य के बाद भी क्या हिमाचल में सिर्फ कांगड़ा जिला ही है।
यहां जिला बना के को जरूरत है , 30 साल से लोग मांग कर रहे हैं, मूलभूत सुविधाएं हैं और जरूरत के मुताबिक स्थान, तो जिला बनाया जाना चाहिए था। जो नहीं बना।

मैं हैरान हुआ ????
जब दशकों से कांग्रेस के झंडाबरदार रहे एक नेता ने कहा कि
राजा साहब जिला बना दो तो इस बार आपको प्रचार के लिए नही आना पड़ेगा, और अगर नहीं बनाया तो फिर कांग्रेस को प्रत्याशी नहीं उतारना पड़ेगा???

वाकई एक बड़ी बात बोल गए ये शख्स।

जब आपको जिला बनाना नहीं था तो आखिर रामपुर बुशहर की जनता के साथ ऐसा मजाक किया ही क्यों…?

राजा साहब, स्वतंत्रता दिवस समारोह तो शिमला ग्रामीण या कांगड़ा में भी मनाया जा सकता था। जन भावनाएं आहत तो न होती।

One comment

  1. congress vaalo aao jra .. vote mangne ……… mjaak k rkh diya cm ne …….. jeet k dikjao ab

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