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सरकार कर रही त्रिस्तरीय संरचना को बर्बाद करने का प्रयास–धूमल

नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री प्रो0 प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस सरकार पंचायतीराज संस्था की त्रिस्तरीय संरचना को बर्बाद करने का प्रयास कर रही है। पंचायतीराज अधिनियम की मूल भावना के खिलाफ, भेदभाव की नीति के तहत जिला परिषद और बी0डी0सी0 के प्रतिनिधियों को जानबूझकर वित्तीय शक्तियों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। केन्द्र से पंचायतों के विकास के लिए मिल रही करोड़ों रू0 की आर्थिक सहायता का सरकार की गलत नीतियों की वजह से उपयोग नहीं हो पा रहा है।
प्रो0 धूमल ने कहा कि पंचायतो के विकास का श्रेय केन्द्र को न मिल सके इसके लिए प्रदेश सरकार आयोग के निर्देशों की गलत व्याख्या करके पंचायतों के विकास को बाधित कर रही है।

आयोग के निर्देश के मुताबिक ’’अनुदान केवल ग्राम पंचायतो को मिलने चाहिए जोकि मूलभूत सुविधाओं की आपूर्ति के लिए सीधेतौर पर उत्तरदायी हैं’’ को राज्य सरकार एक पक्षीय तरीके से लागू करने का प्रयास कर रही है। जबकि 14वें वित्त आयोग के एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में यह साफ कहा गया है कि ’’आयोग प्रदेश सरकारों से अपेक्षा करता है कि वह पंचायतीराज संस्था के अन्य स्तरों की जरूरतों का भी ध्यान रखेगी’’। इस महत्वपूर्ण निर्देश को केवल इसलिए नजर अंदाज किया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस पंचायतीराज प्रतिनिधियों के शक्तिशाली होने से घबरा रही है।
प्रो0 धूमल ने कहा कि सरकार के पंचायतीराज संस्थानो के प्रति नकारात्मक रवैये से केवल जिला परिषद या बी0डी0सी0 ही परेशान नहीं है बल्कि पंचायत प्रधान भी सरकार के तुगलकी फरमानो से परेशान है। ग्राम सभाओं में पारित प्रस्तावों पर धन का वितरण अगर बी0डी0ओ0 और सचिवों के माध्यम से ही होना है तो पंचायत प्रधान, उप प्रधान व पार्षदों के चुनाव की आखिर क्या जरूरत है ? सरकार के इस रवैये से तो पूरा पंचायतीराज ढांचा ही चरमरा जाएगा।
प्रो0 धूमल ने कहा कि पूर्व में भी गांवो के विकास के लिए मिलने वाली किसी भी आर्थिक सहायता या अनुदान का उपयोग अंततः ग्राम पंचायत द्वारा ही किया जाता था, परन्तु धन का आबंटन त्रिस्तरीय ढांचे के अनुरूप हो इसका हमेशा ध्यान रखा गया था। जनता को हमेशा चुने हुए प्रतिनिधियों से आशा रहती है कि वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए धन उपलब्ध करवायेंगे, परन्तु आर्थिक शक्तियों के केन्द्रीयकरण से जनप्रतिनिधि न केवल कमजोर होंगे बल्कि पंचायतीराज सिस्टम भी लड़खड़ा जाएगा।
प्रो0 धूमल ने कहा कि उनसे मिलने आए पंचायतीराज संस्थानो के प्रधानो, उप-प्रधानो और पंचो ने इस बात का भी खुलासा किया है कि लम्बे समय से पंचायतीराज प्रतिनिधियों को मानदेय नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से उन्हें दैनिक कार्य करने में परेशानी आ रही है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह पंचायत प्रतिनिधियों की इस समस्या के प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार करें और आयोग के निर्देशों के प्रति एक पक्षीय रूख न अपनाकर लोकतंत्र की रीढ़ पंचायतीराज संस्था के तीनो स्तरों को वित्तीय शक्तियां उपलब्ध करवायें, ताकि इस अधिनियम की मूलभावना के प्रति न्याय हो सके।

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