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मॉक ड्रिल– हिमाचल में भूकंप की स्थिति

शिमला
हिमाचल राज्य प्राकृतिक व मानव दोनों प्रकार की विभिन्न आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील है। मुख्य आपदाओं में भूकम्प, भूस्खलन, अचानक बाढ़, बर्फ के तूफान, हिमस्खलन, सूखा, बांध टूटना, बस्तियों तथा जंगलों में आगजनी की दुर्घटनाएं, सड़क, रेल, वायु, भगदड़ व नाव पलटने आदि की दुर्घटनाओं के अलावा जैविक, ओद्यौगिक व रासायनिक दुर्घटनाएं भी शामिल हैं। हालांकि प्रदेश को सबसे अधिक खतरा भूकम्प आपदा से है। इतिहास पर यदि नजर डाले तो प्रदेश में 120 बार 4.0 रिक्टर स्केल और उससे ऊपर की तीव्रता के भूकम्प आ चुके हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) भूकम्पीय क्षेत्रीकरण मानचित्र के अनुसार वर्ष 2017 तक प्रदेश के पांच जिलों चम्बा (53.2 प्रतिशत), हमीरपुर (90.9 प्रतिशत), कांगड़ा (98.6 प्रतिशत), कुल्लू (53.1 प्रतिशत) और मण्डी (97.4 प्रतिशत) में 53 से 98.6 प्रतिशत क्षेत्र एमएसके 9 या उससे अधिक तीव्रता के अंतर्गत आते हैं जबकि इन जिलों के शेष क्षेत्रों में भूकम्प की तीव्रता 8 है। दो जिलों बिलासपुर (25.3 प्रतिशत) तथा ऊना (37.0 प्रतिशत) में एमएसके 9 तथा बाकी एमएसके 8 की तीव्रता है। शेष जिलों में भी तीव्रता आठ है।
एनडीएमए, आईआईटी मुम्बई, आईआईटी मद्रास तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा 2012 में विकसित परिदृश्य एमडब्ल्यू 8.0 भूकम्प हिमालय क्षेत्र में आने वाला भारी भूकम्प है। यह काल्पनिक परिदृश्य आईआईटी मुम्बई तथा मद्रास से भूकम्प इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की एनडीएमए टीम द्वारा वाडिया हिमालयन भूगर्भ संस्थान व आईएमडी के भूगर्भ विभाग व भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ परामर्श से विकसित किया गया है। हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले के सुन्दरनगर, जो भूकम्पीय क्षेत्र-पांच में आता है, में काल्पनिक भूकम्प  हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखण्ड, जम्मू-कश्मीर तथा केन्द्र शासित राज्य चण्डीगढ़ में भारी भूकम्प के झटकां के पूर्वानुमान को दर्शाता है।
इस प्रकार की बड़ी मॉक ड्रिल पूर्व में 2012, 2014 तथा 2016 में राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सहयोग से की जा चुकी हैं। वर्तमान में भूकम्प आपदा पर आयोजित किया जा रहा यह मॉक ड्रिल पूर्व के सभी मॉक ड्रिलों से बड़ा है तथा इसमें सभी 12 जिलों, शिक्षण तथा तकनीकी संस्थानों तथा सरकारी विभागों को शामिल किया गया है और इस प्रकार यह मॉक ड्रिल पूरे प्रदेश में आयोजित की गई।
भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की देश-रेख में मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक पूरी की गई।
इसके लिए पूर्व अभ्यास व समन्वय सम्मेलन 1 फरवरी, 2018 को हिमाचल प्रदेश सचिवालय में आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश सरकार के विभागों के 135 अधिकारी, जिला प्रशासन, भारतीय सेना के प्रतिनिधि, अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के सदस्य सेवानिवृत्त लैफ्टिनेंट जनरल एन.सी. मरवाह, एनडीएमए के वरिष्ठ परामर्शी, सेवानिवृत्त मेजर जनरल वी.के.नाईक ने भी सम्मेलन में भाग लिया और मार्गदर्शन किया।
मुख्य सचिव विनीत चौधरी की अध्यक्षता में 7 फरवरी, 2018 को टेबल टॉप अभ्यास किया गया, जिसमें राज्य घटना प्रतिक्रिया दल के सदस्य शामिल हुए। भारतीय सेना के पर्यवेक्षकों, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। उपायुक्त तथा जिला घटना प्रतिक्रिया दल इस अभ्यास में वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
प्रदेश में आज बड़ा मॉक अभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें सभी 12 ज़िले शामिल हुए।
अभ्यास को सफल बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा प्रिंट तथा इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके तहत भूकम्प आपदा से आम लोगों को जागरूक करने के लिए 80 हजार प्रचार पुस्तिकाएं वितरित की गई।
पश्चिमी कमान के सेना तथा भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधियों ने भी इसमें तत्परता से भाग लिया तथा आपदा प्रतिक्रिया ऑपरेशन के दौरान समन्वय के मामलों पर चर्चा की गई। सेना, अर्धसैनिक बल, आईटीबीपी, एनडीआरएफ दलों ने मॉक अभ्यास में भाग लिया। इसके अलावा ज़िला स्रोतों जिनमें पुलिस, चिकित्सा, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, गृह रक्षक आदि भी इस काल्पनिक अभ्यास में शामिल हुए।
काल्पनिक भूकम्प आपदा के दौरान टेलीफोन तथा मोबाईल नेटवर्क सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई, परन्तु टेलीफोन विभाग ने तीन मोबाईल बीटीएस प्रभावित क्षेत्रों- उपायुक्त कार्यालय शिमला, मंडी व नाहन में स्थापित किए। इसके अतिरिक्त आम लोगों के प्रयोग के लिए 10 टेलीफोन-इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, रिज़, हिमाचल प्रदेश सचिवालय में दो, राजकीय महाविद्यालय संजौली में दो, समरहिल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बालुगंज तथा उपायुक्त कार्यालय में स्थापित किए।
राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के सदस्य सेवानिवृत लैफ्टिनेंट जनरल एनसी मरवाह तथा एनडीएमए के वरिष्ठ परामर्शदाता सेवानिवृत मेजर जनरल वीके नाईक के सहयोग व मार्गदर्शन से मॉक ड्रिल के आयोजन में बड़ी सहायता मिली।
प्रदेश सरकार के भूकम्प आपदा से निपटने के लिए उठाए गए कदम व प्रयास
ऽप्रदेश सरकार ने भूकम्प जैसी आपदा से निपटने के लिए अनेक पग उठाए हैं। प्रदेश ने आपदा अतिसंवेदनशीलता, जोखिम आंकलन, (एचवीआरए) एटलस तैयार किया है। हिमाचल राज्य देशभर का एकमात्र ऐसा प्रदेश है जिसने इस प्रकार का एटलस तैयार किया है।
ऽआपदा से निपटने के लिए राज्य तथा ज़िला आपदा आपरेशन केन्द्र 24 घण्टे क्रियाशील है।
ऽराज्य आपदा प्रबन्धन योजना वर्ष 2012 में तैयार की गई तथा इसे वर्ष 2017 में पुनः संशोधित किया गया।
ऽहमने इंजीनियरों, वास्तुकारों, नगर एवं ग्राम योजनाकारों, मिस्त्रियों को सुरक्षित निर्माण अभ्यास व ढांचा सुरक्षा के लिए लिए प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए।
ऽपहली बार 38 विभागीय आपदा प्रबन्धन योजना तैयार की गई।
ऽहमने राज्य, ज़िला व विभागीय आपदा प्रबन्धन योजनाओं की क्षमता के परीक्षण के लिए समय-समय पर भूकम्प आपदा पर मॉक अभ्यास भी आयोजित किए।
ऽराष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के सहयोग से हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम भी कार्यान्वित किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य सभी स्कूलों में बच्चों में सुरक्षा को बढावा देना है।
ऽहमने राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान परिषद एवं प्रशिक्षण (एससीईआरटी) और गवर्नमेंट ऑफ टीचर एजुकेशन (जीसीटीई)को स्कूल सुरक्षा पहल में भी सहयोग दिया।
ऽहमने अस्पतालों की सुरक्षा के लिए वृह्द कार्यक्रम की योजना बनाई है जिसका मूल उद्देश्य प्रदेश के सभी मुख्य अस्पतालों को आपदा से सुरक्षित बनाना है ताकि आपदा के समय मानव तथा अधोसंरचना क्षति को कम किया जा सके।
आपदाओं का प्रबन्धन आवश्यक रूप से एक सहयोगी व जटिल अभ्यास है, जिसमें केवल सरकार के विभिन्न विभाग ही नहीं, बल्कि नागरिक सामुदायिक संगठनों व स्थानीय समुदायों व लोगों की भारी संख्या में भागीदारी है। हम विश्वास करते हैं कि हमने हाल ही के वर्षों में आपदा से निपटने व नुकसान को कम करने के लिए संस्थागत मकैनिज़म स्थापित करने में बढ़ावा दिया है, परन्तु अभी भी हमें इस क्षेत्र में बहुत कुछ करने की आवयकता है। इस तरह के अभ्यास आपदा प्रबन्धन को सुदृढ़ करने तथा क्षमता व समर्थता की राह को प्रशस्त करते हैं। मॉक अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर तैयारियों में सुधार लाना तथा घटना प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करना है। प्रदेश सरकार सभी हितधारकों जिन्होंने इस मॉक अभ्यास को सफल बनाने में सहयोग दिया है उनका आभार व्यक्त करती है।

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