Breaking News

पावर प्रोजेक्ट की स्वीकृतियों में लाएं तेजी- मुख्यमंत्री

शिमला

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने जल विद्युत् ड्वेलपर्स और उत्पादकों के साथ आज यहां आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा उत्पादकों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी शिकायतों को सुना जाएगा तथा इनका निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जल विद्युत् उत्पादन न केवल आर्थिकी की रीढ़ है बल्कि रोज़गार सृजन में भी मद्दगार है। हालांकि पहले जल विद्युत् क्षेत्र में कम प्रगति हुई है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ समय के लिए यह प्रक्रिया रूक सी गई है।

उन्होंने कहा कि छोटे जल विद्युत् उत्पादकों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है ताकि राज्य के लिए इन ऊर्जा उत्पादकों द्वारा चिन्हित लगभग तीन हजार मैगावाट की ऊर्जा क्षमता का दोहन किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी लम्बित पड़े मामलों के समाधान के लिये प्रभावी कदम उठाए जाएंगे ताकि प्रदेश में चिन्हित कुल 27,400 मैगावाट जल विद्युत् क्षमता दोहन किया जा सके। अभी तक केवल 10,519 मैगावाट का ही उत्पादन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल विद्युत् नीति में बदलाव करने पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि पहले चरण में स्वीकृतियां संबंधित सभी विभागों द्वारा लगभग एक माह के भीतर बिना किसी विलम्ब के दी जानी चाहिए। दूसरे, टैरिफ से संबंधित मुद्दों को हल किया जाना चाहिए और तीसरे चरण में योजना के आरम्भ होने से पूर्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि टैरिफ मुद्दे पर नियामक के साथ चर्चा की जा सकती है और वाणिज्यिक कमीशन की तिथि से टैरिक उपयुक्तता का पता लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन स्वीकृति, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य तथा सम्बद्ध विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।

बहुद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि सरकार निश्चित रूप से चर्चा में तय किए मुद्दों के समाधान के लिए तत्काल उपाय करेगी ताकि स्वीकृतियों संबंधी प्रक्रिया, टैरिफ तथा रॉयल्टी मुद्दों का समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि जल विद्युत् नीति में बदलाव करने के प्रयास किए जायेंगे।

हिमालय ऊर्जा उत्पादक संघ के अध्यक्ष अरूण कुमार तथा बोना-फाईड हिमाचल ऊर्जा डिवैल्पर्स संघ के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने हिमालय ऊर्जा उत्पादक संघ के मुख्य संरक्षक आर.के. वर्मा के साथ पिछले दस वर्षों से लम्बित मामलों तथा ऊर्जा उत्पादन में आ रही समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में अन्य राज्यों की तुलना में रॉयल्टी की दरें काफी अधिक है।

उन्होंने कहा कि पंजाब में रॉयल्टी दर 1.5 रुपये प्रति यूनिट, उत्तराखण्ड में 15 वर्षों तक शून्य और 16वें वर्ष के बाद 18 प्रतिशत, जम्मू व कश्मीर में ये दरें पहले 15 वर्षों के लिए शून्य और इसके उपरान्त 16वें वर्ष से 12 प्रतिशत हैं।

हिमाचल प्रदेश में रॉयल्टी दर पहले 12 वर्षों के लिए 12 प्रतिशत और अगले 18 वर्षों के लिए 18 प्रतिशत और इसके पश्चात् शेष 10 वर्षों के लिए 30 प्रतिशत हैं जो काफी अधिक हैं और परियोजनाओं को आर्थिक रूप से अलाभकारी बना रही है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल में दरों में सराहनीय कमी के निर्णय के कारण टैरिफ दरें बहुत कम हैं, जो 2.98 रुपये प्रति यूनिट है जबकि केन्द्रीय विद्युत् नियामक आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए 5.07 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ दर निर्धारित की है। पंजाब और उत्तराखण्ड में यह टैरिफ दर क्रमशः 4.04 रुपये तथा 4.69 रुपये है।

उन्होंने विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए जटिल प्रक्रिया तथा बहुत अधिक ओपन एक्सेस शुल्क के संबंध में भी अपनी शिकायत दर्ज की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अन्य राज्यों की तुलना में यह 1.39 रुपये प्रति यूनिट है, जो बहुत अधिक है। पंजाब में यह शुल्क 0.57 रुपये और उत्तराखण्ड में 0.69 रुपये प्रति यूनिट है।

उन्होंने कहा कि टैरिफ दर परियोजना की व्यावसायिक संचालन तिथियों से सम्बद्ध नहीं है और इसके अलावा ट्रांसमिशन शुल्क भी बहुत अधिक है। उन्होंने ऋण भुगतान की तिथि से 13 वर्षों के लिए बिजली खरीद समझौते की अनुमति देने का आग्रह किया और इसके बाद आपसी समझौते के आधार पर इसे जारी रखने अथवा समाप्त करने की सुविधा प्रदान करने को कहा ताकि इससे दोनों पक्षों के लिए सुविधा हो सके। यदि इस छूट अथवा सुझावों को क्रियान्वित किया जाता है तो सड़कों, पैदल रास्तों व पुलों के अधोसरंचना विकास के अलावा युवाओं को रोज़गार भी उपलब्ध होगा।

परियोजनाओं के निर्माण के दौरान 1,68,464 रोज़गार के अवसर सृजित होने के अलावा 14 हजार स्थाई नौकरियां भी उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी के माध्यम से लगभग 3625 करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त होगा।

पूर्व विधायक दुलो राम, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. धीमान, हिमाचल प्रदेश ऊर्जा उत्पादक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.एन. कपूर, बोना-फाईड हिमाचल पावर डिवैल्पर्स संघ के सलाहकार बी.एम. खन्ना और कमल पाधा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com