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खींचतान- हिमाचल कांग्रेस अपनों से लड़े या विपक्षियों से

शिमला

कांग्रेस पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा विधानसभा चुनावों में भितरघात करने वाले 37 नेताओं पर निष्कासन की गाज के बाद अब कांग्रेस में गुटबाजी की चिंगारी भड़कने लग गई है।

 निष्कासन के बाद पार्टी के रुष्ट नेता और उनके समर्थकों ने सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जिसके बाद अब कांग्रेस के भीतर घमासान छिड़ गया है।
क्योंकि भीतरघात करने के आरोप में निकाले गए नेताओं में अधिकांश नेताओं का संबंध वीरभद्र सिंह खेमे से है। ऐसे में वीरभद्र सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच दरार फिर से बढ़ने लग गई हैं।
 वीरभद्र सिंह और सुक्खू के बीच 36 का आंकड़ा किसी से छुपा नहीं है। चुनाव पूर्व एक दूसरे को पटखनी देने के लिए दोनों ने पूरी कोशिश की। वीरभद्र सिंह ने सुक्खू को अध्यक्ष पद से हटाने के लिए पूरा जोर लगाया लेकिन पार्टी हाईकमान के आशीर्वाद से सुक्खू अध्यक्ष पद पर काबिज रहे नतीजा गुटबाजी के भंवर में फंसी कांग्रेस विधानसभा चुनावों में बुरी तरह से हार गई और विपक्ष में दो दर्जन से भी कम विधायक बैठ पाये।
अब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और कांग्रेस में गुटबाजी हावी ऐसे में कांग्रेस के लिए आने वाले चुनाव भी भारी पड़ सकते हैं।
बताया जा रहा है कि जैसे विधानसभा चुनाव पूर्व सुक्खू ने अपने चहेतों को पूरे प्रदेश में पार्टी के अहम पदों पर काबिज करवाया अब शेष बचे चहेतों को भी एडजस्ट करने के लिए निष्कासन की गाज गिरी है। क्योंकि सुक्खू का कार्यकाल समाप्त हो चुका था लेकिन चुनाव को देखते हुए आलाकमान ने सुक्खू को पद पर बरकरार रखा है। अब तैयारियां यह कि जब संगठन के चुनाव हों तो उस समय सुक्खू की फौज उन्हें फिर से अध्यक्ष पद पर बैठने में सहयोग करे।
सुक्खू का कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की। पार्टी हाईकमान की संस्तुति के बाद ही इन सभी नेताओं का निष्कासन हुआ है।
उधर, निष्कासन का दंश झेल रहे नेताओं ने सुक्खू को पटखनी देने के लिए रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इन नेताओं का कहना है कि यदि उनकी पार्टी में वापसी न कटवाई गई तो सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। प्रदेश भर में पुतले फूंके जाएंगे और धरने प्रदर्शन किए जाएंगे।
ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति होगी। चुनावों में अपनों का भितरघात और अब पार्टी के अपने ही विरोधी।
फिक्र यह कि कांग्रेस अपनों से लड़े या विपक्षी भाजपा से।
इस हालत में 2019 के लोकसभा चुनावों में क्या हाल होगा इसका अंदाजा स्वतः ही लगाया जा सकता है।

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