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क्षेत्र विशेष अनुरूप हिमाचल प्रदेश में बागवानी विस्तार की नई पहल

 शिमला
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां एवं विविध जलवायु अनेक प्रकार के फलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। राज्य में बागवानी विस्तार के लिए मौजूद अपार संभावनाओं को देखते हुए यहां शीतोषण से लेकर उप-शीतोषणीय क्षेत्रों में उगाए जाने वाले 35 से अधिक किस्मों के फलों का सफलतापूर्वक उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश के अनेक भागों में लोगों ने बागवानी को व्यवसाय के तौर पर अपनाया है और राज्य की आर्थिकी में बागवानी का बहुत बड़ा योगदान है।
 राज्य में सेब के अलावा आम, लीची, नीम्बू प्रजाति के फल, पलम, आडू, खुर्मानी, नाशपाती, चैरी, जापानी फल, बादाम, अखरोट, अनार, जैतून आदि की व्यावसायिक बागवानी की जा रही है। बाजार में अच्छे दाम व मांग को देखते हुए कीवी फल, स्ट्राॅबैरी, अनार व पपीता जैसे फलों की बहुतायत में पैदावार करने पर सरकार बल दे रही है। राज्य में फलों की अधिकतर फसलें मैदानी प्रदेशों के बाद तैयार होती है जिससे अच्छे मूल्य प्राप्त होते हैं। सुगन्धित व औषधीय पौधों की खेती तथा मसालों की खेती की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बागवानी मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने राज्य के समस्त बागवानी विशेषज्ञों व बागवानी विभाग के अधिकारियों को कार्यालयों से बाहर खेतों में जाकर अनुसंधान करने के निर्देश जारी किए हैं। बागवानी मंत्री ने बागवानी को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा राज्य के सभी भागों तक पहुंचाने के लिये विभाग को खाका तैयार कर इसे शीघ्र व्यावहारिक बनाने को कहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बागवानी विशेषज्ञ फील्ड में जाकर मुआयना करेंगे और यह तय करेंगे कि क्षेत्र विशेष में वहां के मौसम के अनुरूप बागवानी की योजना तैयार की जाए। पौधे लगाने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी पौधे जीवित रहें।
राज्य के सभी भागों में मिट्टी के उपयुक्त परीक्षण के उपरांत क्षेत्र विशेष में होने वाली बागवानी पैदावार के अनुरूप किसानों को पौध उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे राज्य के अधिक से अधिक किसानों को नकदी फसलों की पैदावार करने में मद्द मिलेगी और उनकी आर्थिकी में वृद्धि होगी, साथ ही फलोत्पादन युवाओं को स्वरोज़गार का ज़रिया भी बनेगा।
राज्य सरकार बागवानी को राज्य के प्रत्येक भाग तक ले जाने की कार्य-योजना तैयार कर रही है। इसके लिये बागवानी विभाग किसानों की मांग और क्षेत्र विशेष की जलवायु के अनुरूप नर्सियां तैयार कर पौधों का वितरण करेगा। अगले तीन महीनों के दौरान विभागीय नर्सियों से विभिन्न प्रजातियों से साढ़े चार लाख पौधे किसानों को उनकी मांग के अनुरूप वितरित किए जाएंगे।
बागवानी मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने राज्य के समस्त बागवानी विशेषज्ञों व बागवानी विभाग के अधिकारियों को कार्यालयों से बाहर खेतों में जाकर अनुसंधान करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। बागवानी मंत्री ने बागवानी को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा राज्य के सभी भागों तक पहुंचाने के लिये विभाग को खाका तैयार कर इसे शीघ्र व्यावहारिक बनाने को कहा है। राज्य के सभी भागों में मिट्टी के उपयुक्त परीक्षण के उपरांत क्षेत्र विशेष में होने वाली बागवानी पैदावार के अनुरूप किसानों को पौध उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे राज्य के अधिक से अधिक किसानों को नकदी फसलों की पैदावार करने में मदद मिलेगी और उनकी आर्थिकी में बृद्धि होगी, साथ ही फलोत्पादन युवाओं को स्वरोज़गार का ज़रिया भी बनेगा।
इस वर्ष मार्च माह तक राज्य में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत गुणवत्तायुक्त 21.23 लाख फलदार पौधे वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न प्रजातियों के ये पौधे डा. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन), चैधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर तथा राज्य की निजी पंजीकृत पौधशालाओं से उपलब्ध करवाए जाएंगे।
बागवानी मंत्री ने सबसे ज्यादा बल इस बात पर दिया है कि पौधे उन्नत किस्म के हों। घटिया किस्म के पौधों के वितरण पर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिये संबंधित विभाग को पौधों की समुचित जांच पड़ताल के बाद ही इनके वितरण को कहा गया है।
बागवानों को उनकी फल फसलों के उचित दाम दिलाने पर राज्य सरकार विशेष बल देगी। मण्डी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत आम, सेब, किन्नू, माल्टा, संतरा व गलगल फलों का प्रापण किया जा रहा है। अच्छे दामों के साथ साथ फल विधायन उद्योग में विविधता लाने के लिये फलों पर आधारित वाईन व साईडर जैसे पेय पदार्थों का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक डिब्बाबंद इकाईयों की स्थापना कर इसके माध्यम से घरेलू स्तर पर फलों एवं सब्जियों के परीक्षण के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई है।
केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत बागवानी के समेकित विकास हेतु प्रदेश में एकीकृत बागवानी विकास मिशन का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित बनाया जा रहा है। मिशन के तहत फल पौधशालाओं, जल संसाधनों का निर्माण, बागवानी फसलों के अंतर्गत क्षेत्र विस्तार, हरित गृहों में संरक्षित खेती, जैविक खेती, मशीनीकरण, फसलोत्तर प्रबंधन, फल विपणन तथा फल विधायन जैसे अनेक कार्यक्रमों पर सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत बागवानी विकास एवं अनुसंधान हेतु अनेक परियोजनाआंे का संचालन किया जा रहा है।
राज्य में पुष्पोत्पादन की अपार संभावनाओं के मद्देनजर बागवानी विभाग इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा। हरित गृहों का निर्माण किया जाएगा। फूलों की खेती स्वरोजगार का एक बेहतर विकल्प भी है और युवाओं को इस नकदी फसल के उत्पादन के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। जलवायु में हो रहे अप्रत्याशित परिवर्तन से फसलों के साथ बागवानी क्षेत्र को भी नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। बागवानों को पानी की उपलब्धता पर ही पौधरोपण करने की सलाह दी गई है। उधर, बागवानी मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को किसानों द्वारा रोपित पौधों व इनकी जीवंतता की रिपोर्ट उन्हें प्रस्तुत करने को कहा है।
बागवानी मंत्री की समूचे प्रदेश तक बागवानी के प्रसार की सोच को आगे बढ़ाने के लिये विभागीय अधिकारियों व विशेषज्ञों के साथ-साथ किसानों व बागवानों को भी बागवानी उत्पादन में रूचि लेकर सकारात्मक पहल करने की आवश्यकता है।

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