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महाशिवरात्रि पर्व की तिथि पर न हो परेशान

शिमला

फाल्गुन मास की चतुर्दशी की रात्रि में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष सन्देह की स्थिति बनी हुई है। शास्त्रानुसार 13 फरवरी को दिन भर त्रयोदशी के उपरांत रात को साढ़े 10 बजे से चतुर्दशी प्रारम्भ होगी और 14 फरवरी की रात्रि तक रहेगी।

चतुर्दशी युक्त निशीथ काल की पूजा 13 को ही मान्य है । परंतु शिवरात्रि पूजन रात को साढ़े 10 बजे के बाद ही करना पड़ेगा। उससे पूर्व की गई पूजा को शिवरात्रि पूजा नही कहा जाएगा।
शिवरात्रि उत्सव 14 को भी रहेगा। दिन भर शिव पूजा, शिवलिंग अभिषेक आदि किया जा सकता है। रात को मध्यरात्रि तक शिव पूजा की जा सकती है । लेकिन ज्योतिष शास्त्र अनुसार 13 रात्रि को ही शिवरात्रि पर्व माना जाएगा।
जहाँ दो दिनों की शिवरात्रि मनाई जाती है और शिव पूजन सायं 8 बजे तक किया जाता है उनके लिए 14 फरवरी ठीक रहेगा। 13 फरवरी को साढ़े 10 बजे के बाद ही पूजन हो सकता है।
बाकी आप सभी विवेकानुसार निर्णय लें तथा अपने पुरोहित के निर्णय अनुसार समझ से काम लें
वास्तव में आपकी भक्ति आपका विश्वास आपकी लगन भगवान की निकटता की अनुभूति करवाती है । इस पर अगर सही मुहूर्त भी हो जाए तो सोने पर सुहागा हो जाएगा।
नास्तिकों को क्या मुहूर्त और क्या शिव भक्ति ।उन्हें कोई फर्क नही पड़ता। अपने अंतर में शिव कृपा की अनुभूति कीजिये ।
शिवरात्रि में मध्यरात्रि को आधा घण्टा आंखे बंद कर ॐ नमः शिवाय का जप करें ।
रीढ़ सीधी हो आंखे बंद हो
लंबा गहरा श्वास लेते हुए मन को दोनों भृकुटियों के मध्य जहां तिलक लगता है वहाँ केंद्रित करने की कोशिश करें ।
भांग धतूरा घोटा मांस मदिरा आदि तामसिक और नशीली वस्तुओं का सेवन न करें भगवान शिव नशे से नही सात्विक भक्ति से प्रसन्न होते है।
दिन भर व्रत रखें और मध्य रात्रि को यथा शक्ति अनुसार जप करें अथवा ध्यान लगाएं । अगली सुबह शिव विसर्जन उपरांत भोजन करें ।
इस प्रयोग से आप निशित रूप से शिव कृपा की प्रत्यक्ष अनुभूति प्राप्त करोगे।
आप निम्न मन्त्रो का जप भी कर सकते है
1 ॐ नमः शिवाय
2 ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
3 ॐ रुद्राय भगवते नमः
4 ॐ नमः महामृत्युंजय महादेवाय नम

शेष आप सभी को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं ।

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