रह जाता कोई अर्थ नहीं

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♨ *।। कोई अर्थ नहीं।।* ♨
नित जीवन के संघर्षों से
जब टूट चुका हो अन्तर्मन,
तब सुख के मिले समन्दर का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं*।।

जब फसल सूख कर जल के बिन
तिनका -तिनका बन गिर जाये,
फिर होने वाली वर्षा का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन
यदि दुःख में साथ न दें अपना,
फिर सुख में उन सम्बन्धों का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

छोटी-छोटी खुशियों के क्षण
निकले जाते हैं रोज़ जहाँ,
फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

मन कटुवाणी से आहत हो
भीतर तक छलनी हो जाये,
फिर बाद कहे प्रिय वचनों का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

सुख-साधन चाहे जितने हों
पर काया रोगों का घर हो,
फिर उन अगनित सुविधाओं का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

 

सुमति शर्मा

2 thoughts on “रह जाता कोई अर्थ नहीं

  1. आप मेरी नीचे लिखी बात को कितना सच मानते हैं:
    एक बहुत सुन्दर कविता है किसी ऐसे कवि की , जिसका नाम भी हमने नहीं सुना है आज से पहले | हम पढ़ते हैं सराहते हैं और भूल से जाते हैं !
    वही कविता हम पहली बार पढ़ रहे हैं , पर कविता का श्रेय दिया गया है : राष्ट्र कवि दिनकर जी को ! इस बार वह कविता हमें अत्यधिक पसंद आती है और हम उसकी शैली में दिनकर जी की छवि ढूंढने लग जाते हैं , वाह वाह करते और दिनकर जी के गुणों का बखान करते थकते नहीं हैं !

    मुझे जवाब नहीं चाहिए , क्योंकि मुझे जवाब मिल गया है ! आप लोगों को जोर झटका जोर से ही लगेगा जब में यह बताऊँगा की उपरोक्त कविता दिनकर जी की नहीं वरन एक बहुत प्रतिभाशाली कवी सुमति शर्मा जी की है !

    वैसे तो यह बड़ी हौसला बढ़ाने वाली बात हो सकती है किसी के भी लिए की उसकी रचना को इतने बड़े कवि की समझी जाये, पर यदि मैं स्वयं को उनकी जगह रखूँ तो मन खिन्नता से भर जाता है कि मेरे श्रम को किसी और का बताया जा रहा है ! सोशल मीडिआ का तो अब ये हाल है कि लोग बेहिचक किसी भी अच्छी रचना को share कर देते हैं ! वो तनिक भी नहीं सोचते की मूल लेखक/कवि पर क्या बीत रही है | मेरा यह मानना है कि हमें किसी भी रचना को साझा करने के पूर्व पूरी जानकारी लेकर ही उसे पोस्ट करना चाहिए !

    यहाँ भी मेरा तो यही कहना है की अपने त्रुटि का सुधार करते हुवे पोस्ट पर मूल रचनाकार को श्रेय देना चाहिए | फैसला आपका है ! वैसे मूल रचनाकार को तो मैं यही सलाह दूंगा की ऐसे ‘अतिक्रमण’ के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी चाहिए यदि उन्हें उचित श्रेय नहीं मिल रहा है तो !

    1. धन्यवाद,
      आपने हमारा ज्ञानवर्धन किया। हमें किसी ने यह कविता भेजी थी और जैसी आई थी हमने वैसी ही वैबसाईट पर अपडेट कर दी।
      आप ने इस त्रुटि को उजागर कर कवयित्री की न्याय दिलाया आपका एक बार फिर से आभार
      आप a4applenews.com के साथ जुड़े रहें।

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