प्रधानमंत्री ने कोठीपुरा में रखी एम्स की आधारशिला

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बिलासपुर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत तथा मुख्यमंत्री वीरभद्र के साथ आज बिलासपुर जिला के कोठीपुरा में खुलने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) की आधारशिला रखने की रसम अदा की। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
1351 करोड़ रुपये के परिव्यय से निर्मित किया जाने वाला एम्स हिमाचल प्रदेश के लोगों को बड़े पैमाने पर लाभान्वित करेगा। लोगों को वृहद चिकित्सा जांच तथा विभिन्न गम्भीर बीमारियों के उपचार के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से वापस राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई 205 एकड़ भूमि में एम्स के निर्माण का प्रस्ताव है।
वीरभद्र सिंह एम्स की आधारशिला रखने में हुई देरी को लेकर काफी चिन्तित हैं क्योंकि उन्होंने कई बार इस मामले को लेकर अपनी चिन्ता जाहिर की और राज्य में इस प्रतिष्ठित संस्थान को स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री और यहां तक कि प्रधानमंत्री से बार-बार आग्रह किया है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य के लोगों को सुकून प्रदान करने के लिए संस्थान निकट भविष्य में शीघ्र बनेगा और इसके शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसका निर्माण शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया ताकि लोगों को उनके घरद्वार के समीप गुणात्मक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त कर सके।
आरम्भ में, एम्स में 750 बिस्तरों की क्षमता के बीस सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक होंगे। संस्थान में हर वर्ष प्रत्येक बैच में एमबीबीएस की 100 सीटें तथा नर्सिंग की 60 सीटें होंगी। परिसर के अन्दर सभी विभाग वाणिज्यिक व आवासीय क्षेत्र से जुड़े होंगे।
प्रधानमंत्री ने ऊना जिला के सलोह में स्थापित किए जाने वाले भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) की आधारशिला रखी।
आईआईआईटी के निर्माण के लिए राज्य सरकार के तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2014 में 60 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाई गई थी। आईआईआईटी का निर्माण 128 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। भारत सरकार लागत का 50 प्रतिशत जबकि राज्य सरकार 35 प्रतिशत खर्च वहन करेंगी और शेष 15 प्रतिशत हि.प्र. ऊर्जा निगम तथा हि.प्र. ऊर्जा ट्रांस्मिशन निगम उद्योग भागीदारों द्वारा वहन किया जाएगा।
आरम्भ में आईआईआईटी में तीन पाठयक्रम शुरू किए गए हैं और कक्षाएं शैक्षणिक सत्र 2014-15 से एनआईटी हमीरपुर में शुरू की गई थी। 160 की वार्षिक क्षमता के साथ इन पाठयक्रमों में कम्प्यूटर सांईस इंजीनियरिंग, इलैक्ट्रॉनिक एवं कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग तथा सूचना प्रौद्योगिकी शामिल हैं। यह देश का 20वां आईआईआईटी हैं।
प्रधानमंत्री ने कांगड़ा जिला के कन्दरोड़ी में 70 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस्पात प्रसंस्करण संयंत्र का भी उद्घाटन किया इसमें हर वर्ष एक लाख टन इस्पात उत्पादन की क्षमता होगी।
इस्पात संयंत्र का निर्माण कार्य भारतीय इस्पात प्राधिकरण ने वर्ष 2014 में शुरू किया था। इससे राज्य के युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
उन्होंने गुणात्मक प्राथमिक शिक्षा देख-भाल के लिए बिलासपुर तथा कुल्लू जिला के लिए टाटा डिजिटर नर्ब सैंटर की भी शुरूआत की। यह राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देख-भाल की सुविधा प्रदान करेगा।
टाटा परामर्शी सेवाओं की पहल डिजिटल नर्ब केन्द्र देशभर में 15 मिलियन लोगों तक पहुंची है।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने बिलासपुर के लूहणू हैलीपैड में प्रधानमंत्री तथा अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया।
केन्द्रीय इस्पात मंत्री वीरेन्द्र सिंह, केन्द्रीय मंत्री थवार चन्द गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री  शान्ता कुमार व प्रेम कुमार धूमल, केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री विष्णु देव सहाय, केन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री जी.एस.बाली, सांसद  अनुराग ठाकुर, विधायकगण व अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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