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आज भी रेलवे स्टेशन के इंतजार में है सुनसान -वियावान ’खोपड़ी’

सतलुज बेसिन पर दशकों से रेल लाईन का इंतजार
सीमा शर्मा, एप्पल न्यूज़, शिमला
पड़ोसी देश चीन ने भारत को घेरने के लिए तिब्बत से सटी हिमाचल की सीमाओं तक सड़क व रेल नेटवर्क का जाल बिछा दिया है लेकिन आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी तिब्बत बाॅर्डर तक कोई रेल लाइन नहीं पहुंच सकी है। सर्वे होते रहे, घोषणाएं और वादे होते रहे फिर भी धरातल पर एक इंच भी काम नहीं हुआ। 1983-84 में ऐसा ही एक सर्वे भानुपली-बिलासपुर से रामपुर बुशहर तक किया गया। चार दशक बाद भी अब तक उसकी कोई सुध नहीं ली जा रही।
रामपुर बुशहर में प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का वह हिस्सा ’खोपड़ी’ आज भी सुनसान वियावान ट्रेन की छुकछुक सुनने को बेताब केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाए पड़ा है। हिमाचल के दिग्गज कांग्रेसी नेता वीरभद्र सिंह ने 1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर यह सर्वे करवाया था। तत्पश्चात छह बार मुख्यमंत्री बने केंद्र में मंत्री बने तीन बार सांसद भी रहे लेकिन फिर कभी इस रेल लाइन की चर्चा तक नहीं हुई। हां, 2016 के केंद्रीय रेल बजट में भानुपली-बिलासपुर-रामपुर रेल लाइन की संभावनाएं तलाशने का फिर से सर्वे करवाने का जिक्र किया गया था लेकिन उस पर भी घोषणा से आगे कोई काम नहीं हुआ।
आज भी कालका से तिब्बत बाॅर्डर के समीप क्योरिक तक करीब 550 किलोमीटर का नेशनल हाइवे एक मात्र साधन है। जो इस समूचे क्षेत्र के लाखों लोगों के आवागमन का साधन है। सड़क बंद तो समझो शेष दुनिया से इलाके का कट जाना। सैन्य गतिविधियां भी इसी एक मात्र सड़क पर निर्भर हैं। करोड़ो पेटियां सेब, खनिज तत्व, निर्माण सामग्री, प्राकृतिक उत्पाद, विद्युत परियोजनाओं के भारी भरकम मशीनरी के साथ ही आम जनमानस की रोजमर्रा जरूरतों का सामान सभी इसी एक मात्र भारत-तिब्बत सड़क पर आश्रित है। इंतजार आज भी लोगों को है कि कब इस रेल लाइन के काम को पटरी पर लाया जाए।
सेवानिवृत डीएफओ आर आर भलैक का कहना है कि वीरभद्र सिंह जब 1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उसके बाद 1984-85 में उन्होंने भानुपली से बिलासपुर होते हुए कोल डैम, सुन्नी, लुहरी, नीरथ, दत्तनगर, नोगली, से रामपुर बुशहर तक रेलवे लाइन बिछाने के लिए सर्वे किया गया था। वह उस समय वन विभाग में बतौर रेंज आॅफिसर रामपुर बुशहर सेवारत थे। रेलवे विभाग की चार सदस्यीय टीम के साथ उन्हें भी भद्राश खड्ड से रामपुर बुशहर तक सर्वे कार्य में शामिल होने का अवसर मिला था। भलैक ने कहा कि क्या इस रूट पर रेलवे लाइन बिछाई जा सकती है या नहीं, इसके लिए रिकाॅनेसेंस सर्वे हुआ था। सर्वे के समय टीम की गाड़ी नेशनल हाइवे पर जगह-जगह खड़ी होती थी और लोकेशन देख कर रिपोर्ट तैयार की जा रही थी। इस दौरान ज़मींन पर कहीं भी लैंड मार्क नहीं लगाए गए थे।
सर्वे अनुसार रामपुर बुशहर से करीब एक किलो मीटर पहले खोपड़ी स्थान पर रेलवे स्टेशन प्रस्तावित था। इस ज़मीन को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रेलवे स्टेशन के लिए रिज़र्व रख लिया था लेकिन इसे विडंबना ही कहेंगे कि चार दशक बाद भी इस रेलवे लाइन को धरातल पर नहीं उतारा जा सका। यदि रेलवे लाइन बन जाती है तो सतलुज बेसिन पर बने पावर प्रोजेक्ट, पर्यटन, सेब ढुलान, व्यापारिक गतिविधियों के साथ ही सामरिक दृष्टि से तिब्बत सीमा तक सैन्य गतिविधियों को गति देने में अहम योगदान होगा।
सेवानिवृत प्रधानाचार्य व रामपुर बुशहर के प्रबुद्ध व्यक्ति खुशहाल ठाकुर का कहना है कि जब सर्वे हुआ था तो पूरे शहर में इसके खूब चर्चे होते थे। प्रस्तावित रेलवे स्टेशन खोपड़ी में उनके पड़ोसी जगदीश चंद शुक्ला की ज़मीन को इस आस से रिज़र्व रखा गया था कि यह रेलवे स्टेशन के लिए अधिग्रहित की जाएगी। वह हमेशा इसके सपने देखा करते थे। इसी बीच यहां सतलुज नदी पर पुल निर्माण के लिए उनकी करीब सात बीघा ज़मीन अधिग्रहित की गई थी। इससे मिली राशि को लेकर वह अकसर उनसे पूछा करते थे ’’मास्टर जी, बताओ इस पैसे का क्या किया जाए…? उम्र 90 साल है और पैसे 55 लाख मिले हैं। यह भगवान का सबसे बड़ा मज़ाक है।’’
खुशहाल ठाकुर ने कहा कि इस स्थान पर पुल बना जो आज तक किसी के काम नहीं आया। सफेद हाथी की तरह सतलुज पर खड़ा है ठीक वैसे ही जैसे रेलवे लाइन व रेलवे स्टेशन का सपना महज़ सपना बनकर रह गया है। रेलवे लाइन का बनना सतलुज बेसिन पर बेहद ज़रूरी है। समूचे क्षेत्र को सड़कों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। भारी ट्रैफिक के दबाव को कम करने, भीड़ से छुटकारा पाने और सिल्क रूट के व्यापार को बढ़ाने के अतिरिक्त यहां के स्थानीय उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचाने में यह रेलवे लाइन अति आवश्यक है। अंग्रेजों ने कालका से शिमला तक रेलवे लाइन बिछा दी थी लेकिन आजादी के बाद राज्य में एक इंच लाइन भी नहीं बिछाई गई। हम सतलुज नदी के तट पर ट्रेन की सीटी सुनना चाहते हैं। जिसके लिए सरकार को जल्द ठोस नीति और कदम उठाने चाहिए।
ऐतिहासिक लवी मेले के अवसर पर रामपुर बुशहर पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से जब रेलवे लाइन को लेकर पूछा गया तो इस पर विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ब्यास बेसिन पर कुल्लू मनाली, लाहुल स्पीति से लेह तक रेलवे लाइन का सर्वे प्रगति पर है। निश्चित तौर पर सतलुज बेसिन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और भविष्य में सरकार इस पर भी कार्य करेगी।
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One comment

  1. शायद इसी सँदर्भ मे रामपुर के तत्कालीन विधायक नीँजू राम ने घोषणा की थी कि वह रामपुर तक रेलगाड़ी पहुंचा कर रहेंगे।

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