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‘ड्यूटी विद लव’- भारत-पाक समझौते से है कनेक्शन

सीमा शर्मा, एप्पल न्यूज, शिमला
46 साल पहले शिमला में भारत-पाक समझौते को लेकर तैयारियां चल रही थी। मौका बेहद खास था। पाकिस्तान के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ही देश की सशक्त प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी शिमला पहुंच रही थी। इस ऐतिहासिक क्षण पर शिमला में कुछ ऐसी कला का नमूना पेश करना था जिसे सदियों तक याद रखा जा सके। इसके लिए हिमाचल पुलिस के आलाधिकारी किसी ऐसे शख्स की तलाश में थे जो एक नायाब नमूना मालरोड पर स्थापित कर पुलिस की लोक मित्र छवि पेश कर सके। यह जिम्मा सौंपा गया तत्कालीन आर्ट कॉलेज के आर्टिस्ट मूर्तिकार प्रो. एमसी सक्सेना को।


भारत-पाक समझौते के लिए इंदिरा गांधी और जुल्फ़िकार अली भुट्टो शिमला पहुंच रहे थे। एक तरफ भवन में तैयारियां चल रही थी, दूसरी ओर शिमला के मालरोड की साज सज्जा भी शुरू हुई। 46 साल पहले इस समझौते में भारत की ओर से इंदिरा गांधी व पाकिस्तान की तरफ से जुल्फिकार अली भुट्टो अपनी पुत्री बेनज़ीर भुट्टो के साथ शिमला पधारे थे। साल 1972 में हुए इस समझौते से करीब एक महीना पहले ही शिमला ब्यूटीफिकेशन का काम भी शुरू हुआ।
इसी बीच पुलिस अधिकारी प्रो. सक्सेना से मिले और उन्हें सुझाया कि वह एक ‘हेल्पिंग हैंड’ यानि दो जुड़े हुए हाथ का चिन्ह तैयार करें। लेकिन यह सुझाव प्रो. सक्सेना को उचित नहीं लगा क्योंकि यह कटे हुये हाथ की तरह प्रतीत होते और कलाकार कभी भी खंडित मूर्ति का निर्माण नहीं करते।

कुछ समय पूर्व ही प्रो. एमसी सक्सेना के रिश्तेदारों के घर से एक नन्हा बालक कहीं गुम हो गया था। पुलिस ने उसे तलाश करने के लिए उस समय पूरी ताकत झोंक दी थी और उस बालक को हाथ पकड़ कर प्यार से ढूंढ कर घर पहुंचाया। प्रो. सक्सेना ने यह दृश्य देखा और अपने जहन में बैठा दिया। जब एक नायाब नमूने को तैयार करने की बात हुई तो उन्होंने उस कल्पना से मूर्ति के सपने को बेजान पत्थर पर तराश कर साकार किया।

यह अनूठी मूर्ति बनी एक मासूम बालक को पुलिस प्यार से दुलारती हुई। निश्चित तौर पर जो पुलिस के आलाधिकारी चाहते थे यह मूर्ति उस पर सौ फीसदी फिट बैठी क्योंकि अभी भी समाज में पुलिस की छवि एक गुस्सेल और क्रोधित जवान के तौर पर ही आंकी जाती है। जो हमेशा गालीगलोच करते हुए असभ्य तरीके से जनता पर केवल रौब जमाते नज़र आते हैं। इसी छवि को सुधारना अधिकारियों के समक्ष एक बड़ी चुनौती थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ मूर्तिकार प्रो एमसी सक्सेना

इसी बीच मूर्ति को अंतिम रूप दिया जा रहा था दूसरी तरफ समझौते की तारीख नज़दीक आ रही थी। तभी इंदिरा गांधी के खासमखास दो ज्योतिषी विशेष रूप से शिमला आए। जब उनकी प्रो. सक्सेना से मुलाकात हुई तो कई विषय पर चर्चा हुई। वह सब अधिकारियों के साथ उस स्थल पर पहुंचे जहां दोनों देशों के नेताओं के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने थे। प्रो सक्सेना ने बताया कि जब ज्योतिषियों ने उस हॉल का दृश्य देखा तो अपनी परामनोवैज्ञानिक दृष्टि से महसूस किया कि यदि ऐसी हालत रही तो समझौता नहीं हो सकेगा। इस बात को दोनों ज्योतिषियों ने उन के साथ साझा किया। उन्होंने सुझाव दिया कि हॉल में लगी नेताओं की तस्वीरों और दूसरे सजावटी साज सज्जा के सामान वहां से हटा दिए जाए। यही नहीं जो पर्दे खिड़की दरवाजों पर लगे है, उन्हें भी हटा दिया जाए और यहां पर केवल नैंसर्गिक सौंदर्य को दर्शाती हुई पेंटिंग ही लगाई जाए, ऐसा ही किया। शिमला आर्ट कॉलेज से हिमाचल के सुंदर दृश्यों वाली पेंटिंग को हॉल में सजाया गया।

पूर्व राष्ट्रपति आर वेंकटरमन के साथ प्रो एमसी सक्सेना

तय समय पर दोनों देशों के प्रधानमंत्री एक टेबल पर बैठे और भारत-पाक समझौता हुआ। पेंटिंग देख कर पाक राष्ट्राध्यक्ष शांत बैठे रहे। लगातार उन तस्वीरों को निहारते रहे और सौहार्द्र के साथ समझौता ज्ञापन की कार्यवाही सम्पन्न हुई।

इसके बाद सभी मालरोड़ की सैर के लिए निकले तो गेयटी थियेटर के एक छोर पर उत्कृष्ट मूर्ति को देखकर सभी उसे निहारने लगे। गुम हुए बच्चों को पुलिस का एक कॉ ओपरेटिव और डिवोशन के साथ खोज कर वापिस लाने का प्रतीक बनी यह मूर्ति सभी के आकर्षण का केंद्र बनी। यह मूर्ति आज भी शिमला माल रोड पर रिपोर्टिंग रूम के सामने देखी जा सकती है।

‘डयूटी विद लव’ के नाम से पहचान बनाने वाली यह वही मूर्ति है जिसे भारत-पाक समझौते के दौरान विशेष रूप से बनवाया गया था। आज भी इस मूर्ति को हिमाचल पुलिस के गौरव का प्रतीक माना जाता है। प्रो. एमसी सक्सेना की ऐसी ही रहस्य और रोमांच में समाई करीब तीन सौ मूर्तियां शिमला सहित पूरे हिमाचल और देश भर के कई शहरों के साथ ही विदेशों में एक अलग पहचान के साथ दशकों से स्थापित हैं।

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