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21 साल की सरकारी नौकरी के बाद ना पेंशन मिली ना चिकित्सा लाभ

 
 गांब कुखेड़ तहसील नूरपुर जिला कांगड़ा के रिटायर कर्मचारी ओम प्रकाश ने नई पेंशन स्कीम कर्मचारी एसोसिएशन के कांगड़ा जिला प्रधान राजिन्दर मन्हास  से अपनी आप बीती सुनाते 73 साल के  इस बजुर्ग की आंखे बार बार छलक जा रही थी। उन्होंने बताया कि 10/1983 से दैनिक बेतन भोगी के रूप में  उनकी नियुक्ति लोक निर्माण विभाग उप मंडल नूरपुर  में बतौर मोटर मेट हुई ।

1984 से 1993 के दौरान  उनका सेवाकाल 10 साल  दैनिक वेतन भोगी के रूप में हो गया तो 1994 में उन्हें रेगुलर किया जाना था। पर विभाग ने उन्हें रेगुलर किया 1995 में  एक साल देरी की बजह यह बताई की 1984 में इन्होंने 365 दिन कार्य नही किया है। इस बजह से इन्हें 1995 से रेगुलर किया गया है। जबकि ओमप्रकाश का कहना है कि 1984 में इन्होंने पूरा साल काम किया है और बकायदा मस्ट्रोल के तहत सैलरी भी ली है 1995 से इन्हें सुपरबाइजर पक्का किया गया और 30 अप्रैल 2004 को यह महज 9 साल 4 माह की रेगुलर नौकरी के बाद रिटायर हो गए। महज आठ माह कम नौकरी की बजह से इन्हें पेंशन नही मिल पाई। जबकि इनके अनुसार इन्हें एक साल देरी से पक्का किया गया।

इस विषय मे 2003 में इन्होंने केस भी दायर किया जिसके तहत इन्हें एक साल की ग्रैजुटी तो मिल गयी पर पेंशन फिर भी विभाग ने नही दी अपितु विभाग ने इन्हें मेडिकल बिलों का भुगतान भी यह कह कर टाल दिया कि जब आपको पेंशन नही है तो मेडिकल बिल कैसे मिल सकते हैं । 2004 से 2019 तक 15 साल इन्होंने लम्बा सँघर्ष खुद को बचाने और हालात से लड़ने में किया इस दौरान इनकी धर्मपत्नी गम्भीर दुर्घटना का शिकार हुई हजारों रुपए इलाज पर खर्च किये पर मेडिकल क्लेम वह नही भर पाए। क्योंकि इनके दिमाग मे यह बात डाल दी गयी थी कि तुम्हे पेंशन नही है तो मेडिकल बिल का भुगतान भी नही हो सकता।

कांगड़ा जिला प्रधान ने बताया कि ओम प्रकाश के 1984 के मस्ट्रोल के संधर्ब में  आरटीआई विभाग को डाली गई है और हर रिटायर कर्मचारी चिकित्सा सुविधा का हक रखता है। उन्होंने बताया कि माननीय उच्च न्यायलय ने 10 साल दैनिक वेतन भोगी के सेवाकाल को 2 साल रेगुलर सेवा के रूप में पेंशन हेतु मानने के आदेश भी पारित किए हैं फिर भी रिटायर कर्मचारियों को यह लाभ सरकार की तरफ से जारी नही किए जा रहे। ऐसे में  एसोसिएशन फिर से न्यायालय में जाने का विचार कर रही है और विषय मे कानूनी राय ली जा रही है तांकि ऐसे सैंकड़ो कर्मचारियों को न्याय दिलाया जा सके ।

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