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निजी स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए गठित हुई त्रिस्तरीय कमेटी, मनमानी पर कसेगा शिकंजा

एप्पल न्यूज़, शिमला

छात्र अभिभावक मंच के शिक्षा विभाग पर महाधरने व एक महीने से चल रहे आंदोलन के फलस्वरूप निजी स्कूलों को मॉनिटर करने के लिए शिक्षा निदेशक ने बहुप्रतीक्षित कमेटी का गठन कर दिया। यह कमेटी त्रिस्तरीय होगी। इन तीनों कमेटियों में तीन संयुक्त शिक्षा निदेशकों की अध्यक्षता में टीमें गठित की गई हैं। इन तीन कमेटियों की अध्यक्षता संयुक्त शिक्षा निदेशक सोनिया ठाकुर, के डी शर्मा व दीक्षा मल्होत्रा करेंगे। इसमें से दो कमेटियों ने अपना कार्य शुरू करते हुए शिमला शहर से निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य प्रारंभ कर दिया।

सबसे पहले शिमला शहर के निजी स्कूलों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया है। इसी तर्ज पर प्रदेशभर के स्कूलों में यह कार्रवाई तुरन्त शुरू होगी व निजी स्कूलों की मनमानी,लूट व भारी फीसों पर शिकंजा कसा जा सके।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने खुशी व्यक्त की है कि कम से कम शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन करने की ज़हमत तो उठाई है। पहली बार संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर के अधिकारी स्कूल विज़िट कर रहे हैं व पूरा रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। इसी क्रम में संयुक्त शिक्षा निदेशक सोनिया ठाकुर ने तारा हॉल व चेप्सली स्कूलों का रिकॉर्ड खंगाला। संयुक्त शिक्षा निदेशक के डी शर्मा ने डीएवी न्यू शिमला व सरस्वती पैराडाइज़ स्कूल का रिकॉर्ड खंगाला। उन्होंने निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन के कदम का स्वागत किया है परन्तु साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को चेता दिया है कि केवल कागज़ काले करने व इंस्पेक्शन की औपचारिकता से काम नहीं चलेगा। निजी स्कूलों पर कार्रवाई धरातल पर दिखनी चाहिए। जब तक फीसें कम नहीं होतीं,पीटीए का गठन नहीं होता,स्कूलों में किताबों व वर्दियों की दुकानें सील नहीं होतीं व उनके रेट में कटौती नहीं होती, स्कूलों फंक्शनों में एमआरपी से ज़्यादा बसूले जाने वाले रेटों पर रोक नहीं लगती, स्कूल अपनी बसें नहीं चलाते, एचआरटीसी की बसों में सीट अनुसार बच्चों की यात्रा सम्भव नहीं होती व बस पास की राशि में कटौती नहीं होती, एचआरटीसी फिक्स मासिक किराए के बजाए स्कूल के कार्यदिवसों के आधार पर राशि नहीं बसूलते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि 18 मार्च 2019 की तर्ज़ पर 8 अप्रैल 2019 की बैठक की कार्यवाही के बिंदु तुरन्त नोटिफाई किये जायें। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इन दोनों दिनों में अभिभावकों व शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों के मध्य बनी सहमति के आधार पर कार्रवाई शुरू हो। इन निर्णयों पर देरी किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं कि जाएगी। उन्होंने शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों को दो टूक कहा कि जब तक फीसों के संदर्भ में रिजल्ट सामने नहीं आते तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मंच ने इस बार आरपार की लड़ाई लड़ने का पूरा मन बनाया हुआ है।

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