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नौणी विवि को NIRF में 80वां स्थान; शीर्ष 100 रैंकिंग में केवल 9 कृषि विश्वविद्यालय

एप्पल न्यूज़, नौणी सोलन

डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा कारवाई गई नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2019 में देश के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में जगह बनाने में लगातार तीसरे वर्ष कामयाब हुआ है। विश्वविद्यालय को इस श्रेणी में 80वां स्थान हासिल हुआ और हिमाचल प्रदेश से शीर्ष 100 में जहग बनाने वाले वह एकमात्र विश्वविद्यालय है। शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में सिर्फ 9 ही बागवानी, कृषि और पशु चिकित्सा से संबन्धित हैं।

इस सप्ताह के प्रारंभ में माननीय राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा नई दिल्ली में जारी की गई रैंकिंग में समग्र, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, कॉलेजों, फार्मेसी और प्रबंधन, चिकित्सा, वास्तुकला और कानून के लिए रैंकिंग की। संस्थानों को टीचिंग, लर्निंग एंड रिसोर्सेज, रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीच और इनक्लूसिविटी और परसेप्शन जैसे मापदंडों पर जज किया गया।

इन रैंकिंग से विश्वविद्यालय के लिए जो उत्साहजनक बात उभर के आई है वो यह रही कि विश्वविद्यालय ने दो मापदंडों में अपने स्कोर में सुधार किया है। रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस में विश्वविद्यालय ने 2018 के मुक़ाबले अपने स्कोर को 5.81 से सुधार कर 2019 में 5.97 करने में कामयाब रहा। इसमें प्रकाशन और प्रकाशन की गुणवत्ता, इंटेलेक्चुवल प्रॉपर्टि राइट्स और प्रोजेक्ट्स,और व्यावसायिक अभ्यास और कार्यकारी विकास कार्यक्रम शामिल हैं। इस वर्ष परसेप्शन में भी सुधार हुआ हैं और यह पिछले वर्ष के 2.01 से बढ़कर 2.41 हो गया।

गुरुवार शाम को विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति डॉ॰ एचसी शर्मा ने वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों को राज्य में सर्वोच्च रैंक हासिल करने और इस रैंकिंग में कृषि क्षेत्र की कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालयों में जगह बनाने के लिए बधाई दी।

डॉ शर्मा ने रैंकिंग में सुधार के लिए और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने अनुसंधान और धारणा में अपने स्कोर में सुधार किया है, लेकिन अभी भी सभी मापदंडों में सुधार की जरूरत है। उन्होनें कहा कि रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए शोध और पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया पर तेज़ी से काम करने के साथ साथ विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ अपने संबंध का भी विस्तार करेगा।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की पहल के तहत कई प्रयास किए हैं और पिछले कुछ महीनों में विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कई तकनीकों को उद्यमियों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इससे पहले विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ जेएन शर्मा ने रैंकिंग कार्यप्रणाली के बारे में समझाया और उन क्षेत्रों पर काम करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया जहां भविष्य में सुधार किया जा सकता है।

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