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सतलुज आराधना- देश में गंगा मैया तो हिमाचल में अब सतलुज “माँ”

एसजेवीएनल की जो शौहरत है, मैया सतलुज की ही रहमत है,
एप्पल न्यूज़, नाथपा किन्नौर
नाथपा डैम उस समय मन्त्रो उच्चारण से गूंज उठा जब यहां सतलुज आराधना की गई। बनारस से आये विशेष पुजारियों द्वारा श्रद्धा पुष्प अर्पित व दीपदान कर सतलुज आराधना की गई।

निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नन्दलाल शर्मा ने सतलुज आराधना की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की। करीब आधे घण्टे तक यहां डैम के एक तरफ से पुजारी मन्त्रो उच्चारण करते रहे और दूसरी तरफ प्रबंधन पुष्प चढ़ा व दीये जलाकर पूजा अर्चना करते रहे। सतलुज में दिया छोड़ने के बाद पूजा की गई।
निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नन्दलाल शर्मा ने कहा कि सतलुज मां के आंचल में दूसरी बार आराधना का आयोजन किया गया है। अब केवल नाथपा में नहीं बल्कि अन्य परियोजना में भी आराधना की जाएगी। रामपुर व लुहरी में भी सतलुज आराधना की जाएगी। इस वर्ष का थीम निर्मल स्वच्छ सतलुज है। उन्होंने कहा कि इसे स्वच्छ रखने का दायित्व सभी का होना चाहिए जो प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सतलुज से जुड़े है।
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे स्वच्छता पखवाड़े के तहत निदेशक नन्दलाल ने सतलुज आराधना में पहुंचे लोगों को स्वच्छ रखने की शपथ दिलाई। प्रतिज्ञा दिलाई की स्वच्छ भारत अभियान के तहत गीले व सूखे कूड़े को अलग- अलग कूड़ेदान में रखेंगे।

महाप्रबंधक संजीव सूद ने कहा कि एसजेवीएनएल का इतिहास देखें तो जबसे परियोजना शुरू की तबसे सतलुज से कुछ न कुछ लेते ही रहे है। सतलुज को हम मां स्वरूप मानते है। सतलुज आराधना का उद्देश्य यह भी है कि जल स्त्रोतों का सरंक्षण करें।

ग्रीक लेखकों ने सतलुज को हेजीड्रस कहा है। रावणहृद नामक झील से निसृत यह नदी पवित्र मानसरोवर के पश्चिम में है। शिपकिला से भारत मे प्रवेश करने के बाद सतलुज करछम पहुंचने से पहले किन्नर कैलाश तथा हिमालय के ऊपरी ग्लेशियर क्षेत्र से आने वाले अनगिनत स्त्रोतों का जल अपने में समाहित कर क्षिप्र से क्षिप्रतर वेग में बहती है। इतिहास के अनुसार मानव सभ्यताएं नदी- घाटी सभ्यताओं के रूप
में ही पनपी व विस्तृत हुई है, मानव एवं नदी परस्पर एक दूसरे पर आश्रित हैं। भारत में नदियां केवल जल ही नहीं अपितु आने साथ -साथ जीवन -धारा को भी सहजता से सहेजे हुए हैं। सतलुज भी ऐसी जीवन दायिनी नदी है।
एसजेवीएन का अस्तित्व सतलुज नदी पर ही निर्भर है। नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन तथा रामपुर हाइड्रो पावर स्टेशन परिचालन व विद्युत उत्पादन के लिए सतलुज की पावन जलधारा पर ही आश्रित है।

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