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शहरी निकायों के हाल- हर सेवा के पैसे सुविधाएं शून्य

एप्पल न्यूज़, सोलन

कुछ माह पूर्व न्यायालय या NGT द्वारा नगर निगम एवं नगर पालिका को रास्तों व सड़क के किनारे कूड़ा डालने के डमपरो को हटाने की वैकल्पिक व्यवस्था के आदेश दिए थे। अपितु सूक्ष्म दृष्टिकोण के कारण कूड़े/कचरे को व्यवस्थित करने हेतु(mobiles dumpers) वाहन द्वारा एकत्रित करने की व्यवस्था तय की व (expenses) व्यय अधिक बढ़ने के कारण आम नागरिकों पर इस का बोझ डाला जा रहा है ।

प्रथम चरण में घरों, कार्यलय व दूकानों (door to door) से एकत्रित करने की एवज में धन वसूली प्रारम्भ हुई व अब जो नागरिक स्वेच्छा से पहले , सड़क किनारे वाले व अब उपलब्ध व्यवस्था में ,(mobile dumper) में कचरा डाल रहे हैं उन से भी वसुली की जा रही है। प्रदेश भर की नगर पालिकाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में rate तह किये है। Solan नगर पालिका ने भी अपनी rate list के अनुसार छोटे , मध्यम दुकानदारों से 💯 प्रति माह व 1200 वार्षिक से 4200 वार्षिक उगाही extortion कर रहा है जो की पूर्णतः ग़ैर क़ानूनी है। नगर पालिका को इस कदर उगाही का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि sanitation tax भी नगर पालिका ले रही है।आय व्यय में परिवर्तन का अधिकार केवल विधानसभा व लोकसभा को है यहां तक की cabinat को भी चर्चा हेतु प्रस्ताव house में रखना पड़ता है । यह सीधे तौर पर उपभोक्ता अदालत का विषय है माननिय उच्च न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। विधानसभा को स्वयं चर्च हेतु प्रस्ताव लेना चाहिए ।नेता विपक्ष व समस्त विधायकों को स्वच्छ भारत अभियान के तहत हिमाचल को एलोकेट हुए 2018 एवं 19 में 34 करोड़ के बजट का हिसाब मांगना चाहिए । मैं निवेदन पूर्वक आपको बताना चाहता हूं कि गत 2016 में world bank से 1.5us अरब डॉलर ऋण जो स्वच्छ भारत अभियान के तहत लिया है वह भी वापस करना है।

विवेक शर्मा solan

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