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शिमला – टूटू के चरस तस्कर और उसकी पत्नी को 20-20 साल जेल, ऐतिहासिक फैसला

एप्पल न्यूज़, शिमला

शिमला जिला की विशेष अदालत ने चरस तस्करी के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तस्कर दीपराम और उसकी पत्नी को 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। चरस तस्करी के मामले में किसी भी अदालत का अब तक का यह सबसे बड़ा फैसला है। शिमला के टुटू की दोषी दीपराम दंपत्ति को जेल के अलावा जुर्माना भी भरना होगा। चरस तस्करी के इस मामले में तीन अन्यों को भी कोर्ट ने जेल की सजा सुनाई है।

शिमला शहर के समीप टूटू निवासी इस दंपत्ति से 16 किलो चरस-अफीम के अलावा इलेक्ट्रॉनिक तराजू बरामद हुए थे। यह मामला 25 मार्च, 2016 को शिमला शहर के टुटू थाने में दर्ज हुआ था। पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार गश्त के दौरान दिव्यनगर के पास पुलिस का सामना अमन तथा विपिन दो युवकों से हो गया। पुलिस को देखकर फरार हो रहे दोनों युवकों को पुलिस ने दबोच लिया। इस आधार पर तलाशी के दौरान अमन तथा विपिन से दस ग्राम चरस तथा दस ग्राम अफीम बरामद हुई।

पूछताछ में पता चला कि इन दोनों युवकों को दिव्यनगर के दीपराम ने चरस बेचने के लिए दी थी। इस आधार पर पुलिस ने दीपराम के दिव्यनगर स्थित घर पर दबिश दे दी। तफ्तीश में पता चला कि दीपराम के दिव्यनगर में दो अलग-अलग जगहों पर घर हैं। मौके से फरार दीपराम के दोनों घरों से पुलिस ने आठ किलो चरस तथा आठ किलो अफीम बरामद की। इस कार्रवाई के दौरान दीपराम के घर से करीब दो लाख 86 हजार नकदी तथा ज्वेलरी बरामद हुई।

पुलिस की कार्रवाई में स्पष्ट हुआ कि दीपराम पत्नी ऊषा के साथ मिलकर चरस तस्करी का धंधा चला रहा है। क्योंकि चरस-अफीम बरामदगी वाला घर भी ऊषा के नाम राजस्व विभाग में दर्ज है। इस आधार पर पुलिस ने चरस तस्करी के आरोप में दीपराम दंपत्ति को दबोच लिया।

कार्रवाई में खुलासा हुआ कि दीपराम को त्यूणी गांव का मेहर सिंह नशे की खेप देता था। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मेहर सिंह को भी हिमाचल से सटी उत्तराखंड की सीमा से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास सवा किलो अफीम बरामद हुई। पुलिस की जांच में स्पष्ट हुआ कि दीपराम और उसकी पत्नी ने शिमला शहर में नशे का कारोबार जमा रखा था। न्यायालय में इस केस की पैरवी कर रहे सुधीर शर्मा का कहना है कि चरस तस्करी में कोर्ट का यह अब तक का सबसे बड़ा फैसला है।

दस-दस हजार जुर्माना

जिला शिमला की अदालत ने चरस तस्करी के जुर्म में दंपत्ति को मादक पदार्थ अधिनियम में दोषी पाते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं, अदालत ने साथ ही दस-दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने इसी मामले में तीन अन्य दोषियों को छह-छह महीने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ज्योत्सना डढवाल की अदालत ने बुधवार को दोषी दंपत्ति दीपराम और पत्नी ऊषा को 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई। प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी में यह अब तक की यह सबसे बड़ी सजा है। इसी मामले में तीन अन्य दोषियों अमन, विपिन और मेहर सिंह को छह-छह माह कारावास दिया गया। सभी आरोपी तीन साल से जेल में हैं।

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