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हिमाचल निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग अध्यक्ष कटोच के खिलाफ जांच पूरी, जल्द हो सकती है बड़ी कार्रवाई

एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के अध्यक्ष केके कटोच पर जल्द ही सरकार बड़ी कार्रवाई करने हुए चार्जशीट कर सकती है। आयोग में बरती जा रही अनियमितताओं और आयोग के सदस्य तथा अन्य कर्मचारियों की शिकायत के आधार पर हुई प्रारंभिक जांच में आयोग अध्यक्ष केके कटोच पर लगे सारे आरोप सही पाए गए हैं।

संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हितेश आजाद ने सरकार के आदेशा पर इस सारे मामले की जांच की जिसकी रिपोर्ट शिक्षा सचिव को भेजी जा चुकी है। अब सरकार ने केके कटोच से 10 दिन के भीतर जवाब मांगा है और कहा है कि क्यों न उन पर कार्रवाई की जाए।

कटोच पर सरकारी पद के दुरुपयोग और स्टाफ से अभद्र व्यवहार करने के साथ ही अनियमितताएं बरतने के आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार इन सभी आरोपों पर कटोच ने सरकार को अपना जवाब भी भेज दिया है जिस पर मंथन करने के बाद सरकार जल्द ही सख्त कार्रवाई करने की फिराक में है।

संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हितेश आजाद की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि आयोग के अध्यक्ष केके कटोच अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह से फेल हुए हैं। आयोग के सदस्य डॉ एसपी कत्याल पर अध्यक्ष केके कटोच प्रभावपूर्ण तरीके से कंट्रोल रखने में असफल साबित हुए हैं और बिना विश्वास में लिए ही कार्य करते रहे।

आयोग की बैठकें नहीं ली गई और अकेले ही निर्णय किए गए जो प्रदेश हिट में नहीं थे। अध्यक्ष और सदस्य के बीच किसी भी तरह का सामंजस्य नहीं था। जिस वजह से आयोग का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। आयोग अध्यक्ष ने कमीशन के बजाय अकेले ही बिना किसी पुख्ता कारणों के निजी संस्थानों में कोर्सिज शुरू और बंद किए हैं। यही नहीं निरीक्षण कमेटी की फाइलों को सदस्य को दिखाया तक नहीं जा रहा है।

लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी अब तक प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण भी नहीं किया जा सका है। जो अपने आप मे सवालिया निशान खड़े करता है। वहीं अध्यक्ष द्वारा सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग की बात भी कही गई है। साथ ही अधीनस्थ स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें प्रताड़ित करने की भी बात बताई जा रही है।

इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत ने आयोग के अध्यक्ष से जवाबतलब किया है। जानकारी के अनुसार बीते दिनों अध्यक्ष का जवाब प्रधान सचिव को मिल गया है। अब इस जवाब पर जल्द ही कानूनी राय के बाद सख्त फैसला किया जा सकता हैं।

अध्यक्ष के खिलाफ आयोग के सदस्य, स्टाफ, एबीवीपी और कई शिक्षण सन्स्थान कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। एबीवीपी ने तो कटोच के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उनका घेराव किया और सरकार से उन्हें पड़ से हटाने तक कि मांग रखी है। वहीं कुछ शिक्षण संस्थानों ने उन पर कई तरह के आरोप भी लगाए हैं।

अब सरकार जल्द ही आयोग के अध्यक्ष  की कार्य प्रणाली के खिलाफ उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर सकती है। उन्हें चार्जशीट भी किया जा सकता है।

गौर हो कि केके कटोच की नियुक्ति पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार के समय जून 2017 में तीन साल के लिए की गई थी। लेकि कटोच पहले से ही विवादों में रहे हैं। लगातार उन पर कई तरह के आरोप लगतार रहे लेकिन वह नकारते रहे। इस बार जांच रिपोर्ट उनके खिलाफ आई हैं। अब देखना है कि सरकार क्या कदम उठाती है।

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