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सौन्दर्यीकरण के नाम पर माल रोड पर लग रहा ग्रहण

शिमला
सौन्दर्यीकरण के नाम पर माल रोड पर लग रहा ग्रहण
सीएम वीरभद्र सिंह ने दिए निर्देश … मूर्ति म्यूराल की मौलिकता को बनाए रखें
म्यूराल के निर्माता मूर्तिकार प्रो. एमसी सक्सेना ही करेंगे म्यूराल का पुनर्निर्माण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचली संस्कृति को मूर्ति म्यूराल के रूप में माल रोड की दीवारों पर पिछले 35 साल से शोभा बढ़ा रहे म्यूराल को पुनर्निर्माण के नाम पर ध्वस्त किया जा रहा है। ADB की फंडिंग से चल रहे सौन्दर्यीकरण में इन म्यूराल और म्यूराल के निर्माता कलाकार प्रो एमसी सक्सेना को नजरअंदाज कर लोकनिर्माण विभाग और नगर निगम प्रशासन ने इस कार्य को ठेकेदार के माध्यम से ऐसे अनाड़ी लोगों को काम सौंपा है जिन्हें कला की कोई कद्र नही और न ही कभी उन्हे इस तरह का कार्य करने का तजुर्बा है।

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यह कार्य किसी से छुपा नहीं है माल रोड पर 3 स्थानों पर हिमाचली संस्कृति को दीवारों पर उकेर कर बनाये इन ऐतिहासिक म्यूराल पर सफेद सीमेंट या प्लास्टर ऑफ़ पेरिस चढ़ाया गया है जबकि मूर्ति कला में कभी भी इन चीजों का इस्तेमाल नही होता। इस तरह की मूर्तिकला का पुनर्निर्माण उसी पदार्थ से किया जाता है जिससे पूर्व में बनी हो।

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इस लापरवाही को लेकर आज शिमला के स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम वीरभद्र सिंह से सचिवालय में मिला और उन्हें इस सब के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कला और संस्कृति के संरक्षक और कद्रदान वीरभद्र सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए की इस कार्य को मूल मूर्तिकार प्रो एमसी सक्सेना के द्वारा ही किया जाए। किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नही की जायेगी और गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।

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इस बाबत मूर्ति म्यूराल के निर्माता कलाकार प्रो एमसी सक्सेना ने कहा कि चीफ आर्किटेक्ट, सचिव मोहन चौहान और सौन्दर्यीकरण के प्रमुख SE सोमदत्त शर्मा ने 2013 से लेकर उन्हें आश्वासन दिया था कि म्यूराल का पुनर्निर्माण उन्हीं से करवाया जायेगा। लेकिन सर्दियों से बचने के लिए यूपी में कुछ समय बिताकर जब वे बीते सप्ताह शिमला पहुंचे तो यहाँ म्यूराल का कार्य किसी और के द्वारा किया जा रहा था। जब वे कार्य देखने गए तो म्यूराल को दुर्दशा देखकर आँखों से आंसू निकल आये। उन्होंने शिमला की बेजान दिवारों पर हिमाचल की संस्कृति को दर्शाती नायाब कृतियाँ उकेरी थी। कभी सोचा नही था कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर उन्हें ऐसी दुर्दशा देखनी पड़ेगी। अगर अभी भी उन्हें कार्य सौंपा जाता है तो वे फिर से इसमें जान फूंकेंगे।

वही सौन्दर्यीकरण कार्य के प्रभारी लोकनिर्माण विभाग के SE सोमदत्त शर्मा ने बताया कि कार्य ठेकेदार को सौंपा गया है। वे ही कार्य करवा रहे है। जब उन्हें बेकद्री की बात कही तो उन्होंने आश्वासन दिया कि वे कल अधिकारियों के साथ कार्य को लेकर बैठक करेंगे। और प्रो सक्सेना को भी बैठक में आमंत्रित किया जायेगा। उहोेंने कहा कि सीएम के निर्देशों का पालन किया जायेगा।
इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए हर साल करोड़ों रूपये खर्च किए जाते है लेकिन सरकार और प्रशासन के नाक तले ऐतिहासिक माल रोड पर ही इस तरह का उदासीन रवैया कला के कद्रदानों ही नहीं बल्कि स्थानीय और सैलानियों के दिलों को भी कचोट रहा है।

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