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किन्नौर में स्वर्गप्रवास से लौटे देवता, मेले की धूम

किन्नौर

जातीय जिला किन्नौर अपनी संस्कृति व परम्परा के लिए प्रसिद्व है। जिला के प्रत्येक गांव में हर अवसर पर मेलों का आयोजन होता रहता है। गर्मी हो या सर्दी हर मौसम मेंं गांव में मेले के आयोजन होता है।

इस अवसर पर अपने इष्ट देवी-देवता का भी उपस्थित होना अनिवार्य माना जाता है, जो शुभ संकेत भी है। इन दिनो माघ माह पर पूह उपमंडल के कई गांव में माघ मेला हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।


माघ मेला समृद्व संस्कृति व ऐतिहासिक है व मेले की अपनी एक अलग पहचान है। इन दिनों खास कर पूह उपमंडल के ठंगी गांव में आठ दिनों तक चलने वाला यह विशेष मेले मनाया जा रहा है।

मेला देवताओ के स्वर्ग प्रवास पर लौटने के साथ ही यह मेला शुरू होता है। आठ दिनों तक चलने वाले इस पर्वको ठंगी गांव के स्थानीय ग्रामीण खासा उत्साह से मनाते हैं।

बताते हैं कि इस मेेले को गांव के इष्ट देवता रापुक शकंर जी व इष्ट देवी कुमफिड-रागशु जी के आदेश अनुुसार पूरे आठ दिन तक चलता है।


मेले का आयोजन ठंगी गांव के बीच खुले मैदान पर धूमधाम से चलता है। यहां पर ग्रामीण पुरूष व स्त्री सभी किन्नौरी पारंपरिक वेशभूषा में सज धज कर आते हैं व गाजे-बाजे के साथ किन्नौरी नाटी लगाते हैं।

इस दौरान बाहरी गांव से मेहमान व नाते रिश्तेदार भी आते हैं, जिनका खूब अतिथि सत्कार भी किया जाता है। ग्रामीण अपने इष्ट देवता से अच्छी फसल, क्षेत्र की सुख-शांति व गांव की समृद्वि की कामना करते हैं।
इसी तरह ग्रामीण गांव के ऐतिहासिक बौद्व मठ जौमखंड मे भी गांव की सुख शांति अच्छे फसल के लिए बौद्व अनुयायियों लामा, जौमो के द्वारा पौथी, जिसे युमपौथी और कड-गज्ञुर पोथी कहते है का पाठ किया जाता है। मेले के दौरान आठ दिन तक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होता है।

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