एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन बल प्रमुख) श्री सुशील सिंगला ने 5 नवंबर को पदभार संभालने के उपरांत वन मुख्यालय, शिमला के सभागार में वरिष्ठ वन अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों और विभागीय प्राथमिकताओं के अनुरूप वन आवरण बढ़ाना, मौजूदा वनों का संरक्षण तथा पौधारोपण की सफलता सुनिश्चित करना उनके कार्यकाल के प्रमुख उद्देश्य होंगे।
लगभग ढाई घंटे चली बैठक में विभिन्न वन वृत्तों के मुख्य अरण्यपालों एवं अरण्यपालों सहित मुख्यालय तथा शिमला स्थित कार्यालयों के वन मंडलाधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। वृत्तों के अधिकारियों ने अपने क्षेत्रों में संचालित कार्यों, उपलब्धियों और चुनौतियों से वन बल प्रमुख को अवगत कराया।

श्री सिंगला ने प्रदेश सरकार के वर्ष 2030 तक वन आवरण 32 प्रतिशत करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वृत्तवार व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्य अरण्यपाल और अरण्यपाल अपने अधीनस्थ वन मंडलाधिकारियों के साथ स्वयं फील्ड में जाकर संभावनाओं का आकलन करें तथा कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालें। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि सी सी एफ और सी एफ स्वयं कार्यस्थल पर उनकी प्रगति और गुणवत्ता का प्रत्यक्ष निरीक्षण करें।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के बजट 2026–27 में घोषित ‘मिशन 32 प्रतिशत’ के अंतर्गत वन आवरण को 28 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित है।
वन बल प्रमुख ने जोर दिया कि पौधारोपण की उपलब्धियाँ अभिलेखों में दर्ज संख्या तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; उनका परिणाम धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए पौधे लगाने के साथ पहले से लगे पेड़ों की सुरक्षा और रोपित पौधों की जीवितता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। पौधारोपण स्थलों का नियमित निरीक्षण और जीवितता दर की समीक्षा की जाए। वह स्वयं मुख्य अरण्यपालों एवं अरण्यपालों से इसकी प्रगति की समीक्षा करेंगे।

उन्होंने कहा कि वृत्त स्तर पर कार्यों की प्रगति और जवाबदेही की समीक्षा मुख्य अरण्यपालों तथा अरण्यपालों के माध्यम से की जाएगी। ये अधिकारी वन मंडलाधिकारियों और फील्ड स्टाफ को साथ लेकर योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करें।
श्री सिंगला ने वानिकी गतिविधियों को विभाग के कार्यों का केंद्र बताते हुए कहा कि वन संरक्षण, संवर्धन और हरित आवरण का विस्तार विभाग के मूल दायित्व हैं। अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल, आपसी विश्वास और सौहार्दपूर्ण कार्यसंस्कृति विकसित करते हुए इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।




