\’\’अरे बेटा सुरेन्द्रररर–! \’\’कमरे के भीतर से किसी बुजुर्ग महिला की कपकपाती सी आवाज आई। \’\’जाओ सुनकर आओ अपनी माता श्री की।\’\’ सुगन्धा ने नाश्ता करते हुए पति से मुँहे बनाते हुए कहा। \’\’हाँ.. हाँ.. जा रहा हूँ……जा रहा हूँ….. तुम भी कभी पूँछ लिया करो उनका हाल-चाल !\’\’ […]



