सन्यासी व्यक्ति को एक स्थान में तीन दिन से ज्यादा नहीं रुकना चाहिए

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एप्पल न्यूज़, शिमला

स्त्री और पुरुष का सम्बन्ध उसका ज्योतिष आधार और ऐसे सम्बन्धों का जीवन पर प्रभाव:- ( पार्ट वन):-
ज्योतिष के अनुसार जब वृहस्पति किसी की जन्म कुंडली में दो चक्कर पूरे कर लेता है जिसमें कि लगभग 12×2=24 साल लग जाते हैं।

इस समय अंतराल में यह सौ प्रतिशत तय है कि किसी भी व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक संबंध बन चुके होते हैं अगर वह स्वास्थ्य के आधार पर ठीक ठाक है। या कोई विशेष योग उसकी जन्म कुंडली में ना पड़ा हो।
लड़कीयों में यह जल्दी हो जाता है और पुरषों में देर से होता है। 16 वर्ष की आयु से लेकर 24 वर्ष की आयु जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है।
जब कोई भी स्त्री या पुरुष या समझ लेे मोह या माया का आपस में कोई मानसिक और शारीरिक सम्बन्ध बनता है तो दोनों के बीच एक ऊर्जा का लेन देन होता है। पुरष की ऊर्जा स्त्री में और स्त्री कि ऊर्जा पुरष में चली जाती है। यह कल शेयर किए वीडियो में जब नर्तकी सन्यासी के पांव छूती है उसी समय स्त्री में संन्यास भाव और सन्यासी में प्रेम का भाव एक से दूसरे में ट्रांसफर हो जाता है।
वो गाना सुना है ना ” ना जाने क्या हुआ जो तूने छू लिया खिला गुलाब की तरह मेरा तन बदन ” बस उसी क्षण से एक कि ग्रह दशा दूसरे पर लागू हो जाती है। उसी क्षण से जीवन बदल जाता है।

इसीलिए अगर आपका जिस क्षण अगर अच्छी ग्रह स्थिति वाले से मानसिक और शारीरिक संबंध बन गया तो आपका जीवन मधुर और अगर खराब ग्रह स्थिति वाले से आपका मानसिक और शारीरिक संबंध बना तो आपके बुरे दिन चालू। आशा राम बापू का किस्सा तो याद है ना।
इसीलिए अगर कोई अध्यात्मिक जीवन जीना चाहता है तो उस व्यक्ति को किसी के जीवन में अपनी तरफ से बिन मांगे चौधरी नहीं बनना चाहिए और किसी ऐसे व्यक्ति से स्पर्श भी नहीं करना चाहिए खासकर अपोजिट सेक्स वाले व्यक्ति से।

इसीलिए हमारे शास्त्रों में लिखा है कि सन्यासी व्यक्ति को एक स्थान में तीन दिन से ज्यादा ना रुकना चाहिए ना ही किसी अपोजिट सेक्स वाले व्यक्ति से छूना चाहिए नहीं तो उसकी सारी अध्यात्मिक शक्तियां उससे ट्रांसफर होकर दूसरे व्यक्ति में चली जाती हैं। उसकी अपनी शक्ति क्षीण हो जाती है। हमारे वेदों में लिखा है कि जो व्यक्ति ऐसा नहीं करता वह सन्यासी नहीं हो सकता।
मैं एक बार पढ़ाती बार बच्चों को इलेक्ट्रिकल चार्ज के बारे में समझा रहा था। मैने एक कंघी को अपने बालों पर रगड़ा उसमे चार्ज आ गया। फिर कागज के छोटे छोटे टुकड़ों को उससे दूर से ही खींच कर बताया कागज के टुकड़ों पर कोई भी इलेक्ट्रिकल चार्ज नहीं था लेकिन कागज के टुकड़े कंघी से आकर चिपक गए। कुछ देर चिपके रहे फिर अपने आप छूट कर गिर गए।
मतलब अगर किसी में शक्ति है तो शक्तिहीन मनुष्य उसकी और आकर्षित होते हैं। और उससे तब तक चिपके रहते है जब तक वे उसका चार्ज या शक्तियां उससे ना छीन ले। जब वे उससे शक्तियां छीन लेते है फिर वे उससे खुद दूर भाग जाते हैं। इसलिए विज्ञान के तथ्य हमारे जीवन में भी लागू होते हैं यजुर्वेद में लिखा है यथा देह यथा ब्रम्हांड।
इसी प्रकार से जब तक किसी स्त्री या पुरुष में शक्तियों का अंतर होता है विज्ञान की भाषा में तब तक दोनो में कुछ ना कुछ आकर्षण होता है जैसे ही मिलन से यह अंतर समाप्त हो जाता है आकर्षण भी समाप्त हो जाता है।
फिर दोनों एक दूसरे से बोर हो जाते है। उसके बाद वे दोनो किसी और के साथ आकर्षण महसूस करने लग जाते हैं जिनसे उनका शक्तियों में काफी अंतर होता है। अगर वे किसी सामाजिक रिश्ते जैसे पति पत्नी से नहीं जुड़े होते एक दूसरे से हमेशा के लिए अलग हो जाते हैं।
इसी को लोग प्रेम का नाम या कोई और नाम देते हैं।
जब आकर्षण होता है तब ऊर्जा निकलती है बहुत मज़ा आता है लेकिन जब एक दूसरे से अलग होते हैं तो ऊर्जा खर्च होती है तब दुख होता है। आकर्षण exothermic और जुदाई endotharmic रिएक्शन होता है।
यथा देह यथा ब्रम्हांड जो बाहर सब कुछ है वहीं हम सब के अंदर भी है।
इसलिए रिश्तों के बनने या बिगड़ने से हमे दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि यह एक अंतहीन प्रक्रिया है यह बार बार होती रहेगी। इन घटनाओं को हमे साक्षी भाव से देख कर अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए।
आप खुद ही याद कर लें जब भी आपने किसी ऐसे व्यक्ति को पहली बार छुआ था जिससे आपका बाद में कोई रिश्ता बना था क्या महसूस हुआ था।

साभार – गोपाल कपूर की फेसबुक वाल से

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