एक ही सर्जरी में दोनों कैंसर का इलाज, चेहरे की बनावट और किडनी की कार्यक्षमता बचाने पर रहा फोकस
एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर
हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर निवासी 73 वर्षीय मरीज ने मल्टी-डिसिप्लिनरी कैंसर उपचार के जरिए स्टेज-IV मुंह के कैंसर और किडनी कैंसर को मात दी है। फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के हेड एंड नेक ऑन्को-सर्जरी तथा यूरो-ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने एक ही सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान दोनों कैंसर का सफल उपचार किया।
मरीज के मुंह के बाईं ओर लंबे समय से घाव था, जो धीरे-धीरे जबड़े की हड्डी तक फैल गया था। इसके चलते उसे खाना चबाने और निगलने में काफी परेशानी हो रही थी। एक अन्य अस्पताल में हुई बायोप्सी में कैंसर की पुष्टि के बाद मरीज ने फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली में डॉ. कुलदीप ठाकुर, कंसल्टेंट, हेड एंड नेक ऑन्को-सर्जरी से परामर्श लिया।
जांच में मुंह का स्टेज-IV कैंसर सामने आया, जो जबड़े तक फैल चुका था। इसी दौरान मरीज की किडनी में भी एक संदिग्ध गांठ पाई गई। आगे की जांच में बाईं किडनी में भी कैंसर की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों कैंसर का एक साथ उपचार करने के लिए विभिन्न विशेषज्ञों की टीम ने संयुक्त रूप से उपचार की योजना तैयार की।

डॉ. कुलदीप ठाकुर ने मुंह के कैंसर से प्रभावित हिस्से, गाल की त्वचा और मसूड़े के प्रभावित भाग को हटाने के साथ गर्दन की सर्जरी की। चेहरे पर बाहर से कोई बड़ा चीरा लगाए बिना कैंसर के दिखाई देने वाले हिस्से को निकालने का प्रयास किया गया। इसके बाद मरीज के बाएं हाथ से ली गई त्वचा की मदद से मुंह के अंदर के हिस्से का पुनर्निर्माण किया गया, जिससे चेहरे की बनावट को भी सुरक्षित रखा जा सका।
इसी सर्जरी के दौरान डॉ. धर्मेंद्र अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, यूरो-ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली ने रोबोट की सहायता से किडनी कैंसर की सर्जरी की। रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी में केवल कैंसर से प्रभावित हिस्से को हटाया गया और किडनी के स्वस्थ हिस्से को बचाया गया। इससे किडनी की सामान्य कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद मिली।
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी अच्छी रही और उसे महज चार दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। खास बात यह रही कि अस्पताल से छुट्टी के समय उसे नाक के जरिए पेट तक जाने वाली राइल्स ट्यूब की जरूरत नहीं पड़ी। बाद की जांच में दोनों स्थानों से कैंसर को पूरी तरह निकालने की पुष्टि हुई। मरीज को आगे कीमोथेरेपी या रेडिएशन की भी आवश्यकता नहीं पड़ी। वर्तमान में मरीज स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।
डॉ. कुलदीप ठाकुर ने कहा कि हेड एंड नेक कैंसर सर्जन और ऑन्को-रीकंस्ट्रक्टिव सर्जन की संयुक्त टीम के साथ उपचार करने से कैंसर को पूरी तरह निकालने के साथ प्रभावित हिस्से का बेहतर पुनर्निर्माण किया जा सकता है। इससे मरीज को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिलती है।
डॉ. धर्मेंद्र अग्रवाल ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी की मदद से जटिल किडनी कैंसर के मामलों में भी केवल प्रभावित हिस्से को हटाकर स्वस्थ किडनी और उसकी कार्यक्षमता को बचाने का प्रयास किया जा सकता है। यह मामला दर्शाता है कि जटिल कैंसर के मामलों में विभिन्न विशेषज्ञों की संयुक्त टीम, समय पर जांच और बेहतर सर्जिकल योजना मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।










