सभी प्रदेशवासियों को.jpg
previous arrow
next arrow

मीमांसा – चिल्ड्रन्स लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के चौथे संस्करण का शिमला में हुआ भव्य समापन

8.6.26 SJVN CORP AD HINDI
previous arrow
next arrow

मीमांसा 2026 का भव्य समापन, पुस्तकों, कहानियों और युवा आवाज़ों के जादू का उत्सव

मीमांसा – चिल्ड्रन्स लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के चौथे संस्करण का शुक्रवार को ऐतिहासिक गैटी कॉम्प्लेक्स, शिमला में भव्य समापन हुआ। हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट, शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय साहित्य महोत्सव में विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। महोत्सव में लेखक, शिक्षाविद्, कलाकार, युवा पाठक और साहित्य प्रेमी भी शामिल हुए।
मीमांसा का उद्देश्य साहित्य और हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी के करीब लाना तथा बच्चों और युवाओं को भाषा, पुस्तकों, कहानी-कथन और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ना है। कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के रचनात्मक सहयोग और कार्यक्रम संयोजन के माध्यम से महोत्सव ने साहित्य को कक्षा और पाठ्यपुस्तकों की सीमाओं से बाहर निकालकर संवादात्मक, रोचक और सहभागी अनुभव में बदलने का प्रयास किया।
महोत्सव के अंतिम दिन कक्षा 2 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए कविता प्रतियोगिता आयोजित की गई। नन्हे प्रतिभागियों ने पूरे आत्मविश्वास, भाव-भंगिमा और उत्साह के साथ कविताओं की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति, हाव-भाव और आवाज़ के उतार-चढ़ाव के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया। निर्णायक मंडल में हिमाचल की लेखिका एवं कवयित्री कल्पना गंगटा, वरिष्ठ हिंदी लेखिका एवं कहानीकार मृदुला श्रीवास्तव तथा कलाकार एवं कहानीकार सीताराम शर्मा शामिल रहे।


इसके बाद शूलिनी विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलपति प्रो. अतुल खोसला के साथ कहानी-कथन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका संचालन पत्रकार एवं लेखिका रितांजलि हस्तीर ने किया। प्रो. खोसला ने बच्चों को अपने आसपास की रोजमर्रा की घटनाओं और अनुभवों को जिज्ञासा की दृष्टि से देखने तथा उन्हें कहानियों में ढालने के लिए प्रेरित किया। संवाद और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने पात्रों, परिस्थितियों, विचारों और अभिव्यक्ति की शक्ति को समझा।
महोत्सव के दौरान आयोजित पुस्तक चर्चाओं ने भी दर्शकों और युवा पाठकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। लेखक अनिर्बान भट्टाचार्य की पुस्तक The Sinister Holiday पर आयोजित सत्र में शिमला के लेखक सुमित राज ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। युवा पाठकों मोक्षिका, शौर्य शर्मा और कृतिका ने भी चर्चा में सक्रिय भागीदारी की। पूर्व निर्धारित प्रतिबद्धता के कारण अनिर्बान कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, इसलिए उनके पिता एवं लेखक प्रोबल जे. भट्टाचार्य ने उनका प्रतिनिधित्व किया। यह सत्र पिता-पुत्र की साहित्यिक यात्रा के संदर्भ में विशेष रूप से रोचक रहा।
इसके बाद लेखक लोकेश ठाकुर ने मॉडरेटर जसलीन गुलाटी के साथ अपनी पुस्तक CoMaTose पर संवाद किया। युवा कॉलेज पाठकों स्नेहा हरनोट, ईशा ठाकुर और तरुण शर्मा ने चर्चा में भाग लेते हुए युवाओं, शिक्षा, रिश्तों और समकालीन जीवन से जुड़े विषयों पर सवाल और विचार रखे। इस सत्र ने यह स्पष्ट किया कि मीमांसा में युवा केवल श्रोता नहीं, बल्कि साहित्यिक संवाद के सक्रिय सहभागी हैं।
महोत्सव का बहुप्रतीक्षित समापन साहित्यिक सत्र मुख्य अतिथि नलिनी रामचंद्रन के साथ हुआ। युवा पाठक पृथ्रा डोगर ने उनसे उनकी पुस्तक Once Upon A Beginning: Incredible Origin Stories From India पर संवाद किया। लेखिका, संपादक, कहानीकार और TEDx वक्ता नलिनी रामचंद्रन ने पौराणिक कथाओं, लोककथाओं, जनजातीय परंपराओं, क्षेत्रीय आख्यानों तथा प्रकृति और संस्कृति के संबंध पर विस्तार से लेखन किया है। संवाद के दौरान भारत में कहानियों की उत्पत्ति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक स्मृतियों के महत्व पर चर्चा हुई


पृथ्रा डोगर, जिन्हें लेखन, भाषाविज्ञान, वक्तृत्व और वाद-विवाद के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए जाना जाता है, ने लेखिका के साथ सीधे संवाद कर युवा पाठकों की सक्रिय भागीदारी की मिसाल प्रस्तुत की। सत्र ने मीमांसा की मूल भावना को रेखांकित किया कि युवा केवल साहित्य के पाठक नहीं, बल्कि साहित्यिक संवाद के सक्रिय सहभागी भी बनें।
तीन दिवसीय मीमांसा 2026 में शिमला शहर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से 400 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। महोत्सव में Swaran Public High School, Doon Valley Public School, St. Thomas School, Saraswati Shiksha Mandir High School Shanan, Monal Public Senior Secondary School, Auckland House School for Boys, Auckland House School, Sambhota Tibetan School, Delhi Public School Shimla, Saraswati Paradise International Public School, Dayanand Public School, Monal Public School, GSSS Baghi, ECI Chalet Day School, Sacred Heart Convent, St. Edward’s School, Loreto Convent Tara Hall, SVGC Ghumarwin, Chapslee School, GSSS Majhar और Aryan Public School Sunni सहित अनेक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही।
उच्च शिक्षा संस्थानों से भी उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली। इनमें Government Sanskrit College Sundarnagar, Sanjauli College, Rajkiya Kanya Mahavidyalaya, Himachal Pradesh University (HPU), Kotshara College और St. Bede’s College प्रमुख रहे।
महोत्सव के अंतिम दिन पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें तीन दिनों के दौरान आयोजित विभिन्न साहित्यिक, कलात्मक और भाषाई प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। भाषण, कविता, कला, शब्दावली, कहानी-कथन तथा पुस्तक से पटकथा जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
पुरस्कारों के माध्यम से विद्यार्थियों की उपलब्धियों के साथ-साथ उनके साहस, रचनात्मकता, सहभागिता और सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखने के आत्मविश्वास को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं के परिणाम संलग्न हैं।
तीन दिनों तक गैटी कॉम्प्लेक्स पुस्तकों और युवा मनों के मिलन स्थल में परिवर्तित रहा। यहां लेखकों और पाठकों के बीच संवाद हुआ, कलाकारों ने उभरती प्रतिभाओं से मुलाकात की और विद्यार्थियों ने अनुभव किया कि साहित्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित विषय नहीं, बल्कि जीवंत, समकालीन और उनके अपने जीवन से गहराई से जुड़ा माध्यम है।
महोत्सव ने यह महत्वपूर्ण संदेश भी दिया कि किताबें और शब्द बच्चों के जीवन में जादू भर सकते हैं, लेकिन उस जादू को अनुभव करने के लिए उन्हें अवसर देना आवश्यक है। जब बच्चे किसी पुस्तक पर चर्चा करते हैं, लेखक से प्रश्न पूछते हैं, दूसरे पाठकों के विचार सुनते हैं और पुस्तक के विचारों को अपने अनुभवों से जोड़ते हैं, तब साहित्य उनके लिए अधिक अर्थपूर्ण बन जाता है।
मीमांसा 2026 के समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी सहभागी विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों, लेखकों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और युवा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उनके उत्साह और सक्रिय सहभागिता ने इस महोत्सव को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मीमांसा 2026 का समापन केवल पुरस्कारों के साथ नहीं हुआ, बल्कि सैकड़ों युवा मन अपने साथ नई कहानियां, नए विचार और पुस्तकों के प्रति एक नया उत्साह लेकर लौटे। यही साहित्य का वास्तविक जादू है।

Share from A4appleNews:

You May Like

Breaking News