सुधीर शर्मा का जयराम सरकार पर तंज- “ताश के पत्ते फेंटने से जोकर, हुकुम का इक्का नहीं बन जाता”

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एप्पल न्यूज़, धर्मशाला

सुधीर शर्मा ने कहा की “ताश के पत्ते फेंटते रहने से जोकर, हुकुम का इक्का नहीं बन जाता”। उन्होंने ये बात सरकार द्वारा बार बार किए जा रहे हैं प्रशासनिक फेरबदल पर तंज कसते हुए कही।
सुधीर शर्मा ने कहा है कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को निशाना बना रही है प्रजातंत्र में जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों का यह दायित्व बनता है कि वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे और चुनाव में किए गए वादों को पूरा करे लेकिन इससे उलट प्रदेश में भाजपा सरकार अपनी घोषणाओं को पूरा न होते देख सारा ठीकरा प्रशासनिक अधिकारियों के ऊपर थोप रही है।

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सुधीर शर्मा ने कहा सरकार ये भूल चुकी है लिए चुने हुए प्रतिनिधियों की ज़िम्मेवारी है कि वो अधिकारियों से काम लें लेकिन दिशाहीन सरकार यह करने में विफल रही है जब अधिकारियों को स्पष्ट रूप से यही नहीं बताया जाएगा कि सरकार की नीति क्या है और प्रदेश हित में दूरगामी क्या कार्य करने हैं तो ऐसा होना संभव है ये वर्तमान सरकार की भड़ास है जिसे वो तबादलों के रूप में अधिकारियों के ऊपर निकाल रही है।
जव किसी भी अधिकारी को एक पद पर थोड़ा समय भी रुकने नहीं दिया जाएगा तो आप उसकी कार्यप्रणाली पर कैसे शक कर सकते हैं ?
ऐसा तो नहीं कि बाहरी दबावों के चलते इस प्रकार की फेरबदल प्रदेश के अंदर किए गए हों ?
बार बार प्रशासनिक ढांचे में फेरबदल होने से प्रदेश के आला अफ़सरों का मनोबल गिरा है और जनता का भी सरकार के ऊपर से विश्वास उठ चुका है यह साफ़ हो चुका है अपनी विफलता का ठीकरा सरकार दूसरों पर फोड़ना चाहती है।
बार बार के फेरबदल से प्रदेश में विकास की गति रूक गई है, जिस सरकार को यह नहीं पता कि किस अधिकारी से उसे क्या कम लेना है उससे प्रदेश की जनता क्या उम्मीद कर सकती है।

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