एप्पल न्यूज, शिमला
दृष्टिहीन जन संगठन हिमाचल प्रदेश के पदाधिकारी पंकज ने शिमला में कहा कि 1118 दिन धरने प्रदर्शन के बाद भी दृष्टिहीनों को कुछ नहीं मिला। बैकलॉग की बात करें तो इस दबे कुचले वर्ग की हजारों पोस्टें बनती है लेकिन ये 100- 150 लोगों को नौकरी देने की बात भी नहीं करते।
9 साल से लेकर नौकरी के लिए लड़ रहे है लेकिन नौकरी किसी भी सरकार ने नहीं दी। जो शख्स छोटा शिमला में धरने के दौरान सड़क से नीचे गिर गया था उसकी हालत दयनीय है लेकिन सरकार ने उसकी आज तक सुध नहीं ली।
न तो सरकार न अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

सरकार ने 1995 से लेकर नौकरी नहीं दी। 2005 में ब्लाइंड स्कूल संगठन के प्रयासों से ही खुल पाया था। जब सरकार इस वर्ग के लिए सुविधाएं ही नहीं दे रही तो फिर पढ़ेंगे और आगे कैसे बढ़ेंगे।
पांडवों की तरह हम केवल 5 गांव यानी 100-150 नौकरी मांग रहे हैं। ऐसा न हो कि कौरवों वाली स्थिति हो।
सरकार केवल वोट बैंक देखकर नौकरी देता है जो इस वर्ग के पास नहीं है। अब ठगने ठगाने का खेल नहीं चलेगा।
19 तारीख तक यदि सरकार इस वर्ग पर विचार नहीं करेगा तो फिर आमरण अनशन करेगा। दूसरा ग्रुप दिल्ली में राहुल गांधी से मिलेगा और यदि फिर भी स्थिति नहीं बनी तो विधानसभा के बाहर आत्मदाह से भी पीछे नहीं हटेंगे।
ये इसे गीदड़भभकी न समझें।
उन्होंने अपील की है कि मानवता के नाते दृष्टिहीन जनों को उनका हक दें, तिरस्कार न करें।
हम तो अंधे हैं ये सरकार तो अंधे के साथ बाहरी भी है। अब आंदोलन होगा तो शहीद होने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
संगठन के अध्यक्ष शोभू राम ने कहा कि 652 दिनों से चल रहे धरने के बीच CS और मंत्री के साथ भी बैठकें हुई लेकिन मुख्यमंत्री उन्हें बैठक के लिए भी समय नहीं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री खुद इस वर्ग की सुनवाई करने को तैयार नहीं तो फिर आंदोलन के अलावा कोई और चारा नहीं बचता। उन्होंने कहा कि बैकलॉग भरने के लिए हर विभाग से डाटा मांग रहे हैं लेकिन ये इस वर्ग को ठगने का सिर्फ एक शगूफा ही साबित हुआ है।
शिक्षा विभाग में MTS भर्ती किए जाते थे लेकिन मौका नहीं दिया। केवल 9843 क्लास 4 के पद खाली हैं। 97 पद दृष्टिहीन वर्ग के बनते हैं जहां एक भी पद नहीं भरा है।







