कांग्रेस राज में शिक्षा का बंटाधार, खाली पदों और अव्यवस्था की कीमत छात्र चुका रहे हैं- संदीपनी भारद्वाज

पहले शिक्षकों के पद खाली, अब कॉलेज बंद करने की तैयारी—यह सुधार नहीं, शिक्षा पर हमला है

एप्पल न्यूज़, शिमला

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार की शिक्षा नीति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस राज के दौरान शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

सरकार अब उन महाविद्यालयों को बंद करने की बात कर रही है, जहां विद्यार्थियों की संख्या 100 से कम बताई जा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कॉलेजों में दाखिले कम होने का सबसे बड़ा कारण शिक्षकों के हजारों खाली पद और पढ़ाई की बदहाल स्थिति है, न कि छात्रों की रुचि की कमी।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि अटैचमेंट में दिए गए आधिकारिक आंकड़े कांग्रेस सरकार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। कुल 2781 सृजित पदों में से 587 पद आज भी खाली पड़े हैं, यानी लगभग हर पाँचवां पद रिक्त है।

संगीत वादन में 62 के 62 पद भरे नहीं जा सके, शारीरिक शिक्षा में 73 में से 31 पद खाली हैं, कॉमर्स में 288 में से 21 पद रिक्त हैं, पेंटिंग, अप्लाइड आर्ट, फिजिकल साइंस, सोशल साइंस, पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। यही नहीं, कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे आधुनिक विषयों में सृजित पदों की तुलना में भारी असंतुलन नजर आता है।

उन्होंने कहा कि विषयवार स्थिति और भी चिंताजनक है। अंग्रेज़ी के 272 में से 50 पद, हिंदी के 198 में से 52 पद, फिजिक्स के 170 में से 30 पद, केमिस्ट्री के 194 में से 45 पद, बॉटनी के 135 में से 44 पद और जूलॉजी के 137 में से 47 पद खाली हैं।

इतिहास, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन और दर्शनशास्त्र जैसे विषयों में भी दर्जनों पद रिक्त हैं। ऐसे में यह कैसे उम्मीद की जाए कि छात्र इन कॉलेजों में दाखिला लेंगे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी?

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीयत साफ नहीं है। पहले जानबूझकर पद खाली रखो, फिर दाखिले कम होने का बहाना बनाकर कॉलेज बंद कर दो—यह शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा का विनाश है।

इससे ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, जिन्हें पहले ही सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करनी पड़ती है।

संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस के शिक्षा मंत्री से सीधे सवाल पूछते हुए कहा—

जब कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो विद्यार्थी दाखिला कैसे लेंगे?

587 से अधिक खाली पदों को भरने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए?

क्या कॉलेज बंद करना शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक विफलता से बचने का आसान रास्ता है?

क्या सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएं?

उन्होंने कहा कि भाजपा यह स्पष्ट करती है कि कॉलेज बंद करना समाधान नहीं, बल्कि शिक्षकों की भर्ती, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना ही असली सुधार है।

यदि कांग्रेस सरकार ने इस जनविरोधी फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो भाजपा छात्र, अभिभावक और शिक्षक समुदाय के साथ मिलकर इसका पुरज़ोर विरोध करेगी।

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