किन्नौर की सांगला घाटी में प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बना कूपा डैम, 16 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज

वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीम ने सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया पक्षी अवलोकन, क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी पर्यटन की संभावनाएं उजागर।

एप्पल न्यूज़, सांगला, किन्नौर

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर की खूबसूरत सांगला घाटी में स्थित कूपा डैम पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। यहां विभिन्न जलीय पक्षियों, प्रवासी पक्षियों तथा नदी तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षियों की मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों के महत्त्व को दर्शाती है।

वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीम द्वारा कूपा डैम एवं आसपास के संभावित पक्षी आवासों का विस्तृत अवलोकन किया गया। इस पक्षी अवलोकन अभियान में गोपाल नेगी, वन खंड अधिकारी; संतोष ठाकुर, वन खंड अधिकारी; कुमारी अल्पना, वन मित्रा; तथा तेनजिन नेगी, बर्डर शामिल रहे। टीम के सदस्यों ने सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक लगभग पांच घंटे क्षेत्र के विभिन्न संभावित स्थलों का निरीक्षण कर पक्षियों की मौजूदगी का अवलोकन किया।

इस दौरान दर्ज की गई पक्षी प्रजातियों में जलीय पक्षियों के साथ-साथ नदी और जलधाराओं के आसपास पाए जाने वाले पक्षी भी शामिल हैं। यह अवलोकन सांगला घाटी में पक्षी विविधता के दस्तावेजीकरण और प्राकृतिक आवासों के महत्त्व को समझने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

कूपा डैम एवं आसपास दर्ज की गईं 16 पक्षी प्रजातियां

  1. Ibisbill (Ibidorhyncha struthersii)
  2. Eurasian Coot (Fulica atra)
  3. Common Teal (Anas crecca)
  4. Garganey (Spatula querquedula)
  5. Great Cormorant (Phalacrocorax carbo)
  6. Northern Shoveler (Spatula clypeata)
  7. Ferruginous Duck (Aythya nyroca)
  8. Mallard (Anas platyrhynchos)
  9. Northern Pintail (Anas acuta)
  10. Gadwall (Mareca strepera)
  11. Black-winged Stilt (Himantopus himantopus)
  12. White-capped Redstart (Phoenicurus leucocephalus)
  13. Plumbeous Water Redstart (Phoenicurus fuliginosus)
  14. Brown Dipper (Cinclus pallasii)
  15. Common Sandpiper (Actitis hypoleucos)
  16. Green Sandpiper (Tringa ochropus)

पक्षी विविधता संरक्षण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र

कूपा डैम और इसके आसपास का नदी तटीय क्षेत्र विभिन्न पक्षी प्रजातियों के लिए भोजन, विश्राम और आवास की संभावनाएं उपलब्ध कराता है। विशेषकर प्रवासी जलपक्षियों के लिए ऐसे जलस्रोत मौसमी प्रवास के दौरान महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
श्री अशोक नेगी आईएफएस उप अरण्यपाल सराहन वाइल्डलाइफ ने बताया कि यह प्रवासी पक्षी हर वर्ष अक्टूबर के महीने में यहां पहुँचते हैं और मार्च अप्रैल तक यहीं रहते हैं ।
उन्होंने कहा की वन्यप्राणी रेंज सांगला की टीमों को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दिशा निर्देश दिए हैं कि वो कुप्पा डैम और अन्य क्षेत्रों की निगरानी रखें ,ताकि इस वर्ष भी सभी पक्षियों की पहचान और गिनती की जा सके और उनके संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सके।।


सांगला घाटी की भौगोलिक स्थिति, बसपा नदी का प्राकृतिक परिवेश और आसपास के विविध आवास इसे पक्षी अवलोकन तथा जैव विविधता के अध्ययन के लिए एक संभावनाशील क्षेत्र बनाते हैं। इस प्रकार के नियमित सर्वेक्षणों से पक्षियों की प्रजातियों, उनकी मौसमी गतिविधियों और आवास संबंधी आवश्यकताओं का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करने में मदद मिल सकती है।

बर्डवॉचिंग और प्रकृति पर्यटन की अपार संभावनाएं

किन्नौर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं, नदियों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। कूपा डैम में पक्षियों की मौजूदगी क्षेत्र में बर्डवॉचिंग, प्रकृति फोटोग्राफी और पर्यावरण आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाओं को रेखांकित करती है।

स्थानीय युवाओं को पक्षी पहचान, प्रकृति मार्गदर्शन और जैव विविधता के दस्तावेजीकरण से जोड़कर संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।

प्राकृतिक आवासों का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी

पक्षियों के सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के लिए जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना, प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को जलक्षेत्रों में जाने से रोकना और पक्षियों को अनावश्यक रूप से परेशान न करना आवश्यक है। स्थानीय समुदायों, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी से इन प्राकृतिक स्थलों का संरक्षण अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

कूपा डैम में पक्षियों का अवलोकन किन्नौर की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर को पहचानने और संरक्षित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। ऐसे प्रयास न केवल पक्षी विविधता के दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।

कूपा डैम, सांगला किन्नौर— हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, पक्षी विविधता और संरक्षण की नई संभावनाओं का प्रतीक।

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