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नौणी विश्वविद्यालय और कौशल विकास निगम ने 8 कौशल विकास कार्यक्रम किए शुरू, किसानों में उद्यमिता को देंगे बढ़ावा

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एप्पल न्यूज़, नौणी सोलन

किसानों और युवाओं के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने आज हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के सहयोग से आठ कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए। दोनों संगठनों के बीच हस्ताक्षरित एक समझौते के तहत यह कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। विश्वविद्यालय में ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में आयोजित एक समारोह में सभी प्रशिक्षण समन्वयकों की उपस्थिति में नौणी विवि के कुलपति डॉ परविंदर कौशल द्वारा कौशल विकास कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया।

 कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरीश शर्मा ने मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय स्टेशनों के सभी प्रशिक्षण समन्वयकों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन विकास में मदद करेगा और प्रौद्योगिकी मॉड्यूल के क्षेत्र-विशिष्ट हस्तांतरण से कृषक समुदाय में प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ावा देगा।

डीन कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर और इन कार्यक्रम की समन्वयक और प्रधान अन्वेषक डॉ. अंजू धीमान ने बताया कि विश्वविद्यालय ने कौशल विकास निगम के साथ समझौते के तहत कृषि और संबद्ध विज्ञान में कौशल विकास केंद्र की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के तहत ज्ञान साझा करने और कौशल विकास और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए उद्योग-संबंधित सामग्री विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत 45 बेसिक स्तर और 16 मास्टर स्तर का प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे जिससे राज्य के 1220 किसानों को लाभ होगा।

 सभा को संबोधित करते हुए  डॉ. सनील ठाकुर, जीएम कौशल विकास निगम ने कार्यक्रम के शुभारंभ पर विश्वविद्यालय को बधाई दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि निगम विश्वविद्यालय के साथ साथ प्रशिक्षुओं को अपना उद्यम शुरू करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि समझौता ज्ञापन का उद्देश्य उद्यमिता के साथ-साथ उद्योग के लिए कुशल जनशक्ति को प्रशिक्षित करना है।

 इस अवसर डॉ परविंदर कौशल ने विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी करने और किसानों के कौशल को उन्नत करने की पहल के लिए निगम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जिन आठ विषयों को चुना गया है, उनमें हिमाचल प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं और किसान न केवल अपनी आजीविका कमा सकते हैं, बल्कि नौकरी प्रदाता भी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं को विश्वविद्यालय की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहिए और विभिन्न सरकारी योजनाओं की मदद से इन विषयों में अपना उद्यम शुरू करना चाहिए।

डॉ. कौशल ने बताया कि कुल 61 प्रशिक्षणों में से 27 मुख्य परिसर नौणी, आठ कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नेरी में और पांच कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, थुनाग में आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र और अनुसंधान केंद्र क्रमशः सात और 14 प्रशिक्षण आयोजित करेंगे। डॉ. कौशल ने कहा कि विश्वविद्यालय मास्टर्स प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं का चयन करेगा ताकि उन्हें किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।

कार्यक्रम सह समन्वयक डॉ. धर्मेश गुप्ता ने डॉ. कुमुद सिंह, एमडी हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम और उनकी टीम को विश्वविद्यालय को कृषि-बागवानी गतिविधियों में युवाओं को प्रशिक्षण देने का काम सौंपने के लिए धन्यवाद दिया। निदेशक अनुसंधान डॉ. रविंदर शर्मा, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. दिवेंद्र गुप्ता, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. एच.आर. शर्मा, छात्र कल्याण अधिकारी डॉ. जेके दुबे, वित्त नियंत्रक सी.आर. शर्मा और विभागाध्यक्ष सहित विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय केन्द्रों के वैज्ञानिक  और प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

 इन विषयों पर आयोजित होंगे सात दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम  

खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन, मशरूम की व्यावसायिक खेती; वाणिज्यिक मधुमक्खी पालन; औषधीय और सुगंधित पौधों का उत्पादन और प्रसंस्करण; वाणिज्यिक फूलों की खेती और मूल्यवर्धन; टेम्परेट फल फसलों का कैनोपी प्रबंधन; टेम्परेट फल फसलों का प्रसार और नर्सरी प्रबंधन और सब ट्रॉपिकल फल फसलों का नर्सरी प्रबंधन।

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