एप्पल न्यूज़, शिमला
स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी महासंघ एवं अध्यक्ष, एनजीओ केएनएच शिमला मनोज शर्मा ने कहा कि हम, कामला नेहरू अस्पताल (KNH) शिमला से जुड़े कर्मचारी, एनजीओ एवं आम जनता, सरकार के उस निर्णय का कड़ा विरोध करते हैं जिसमें केएनएच को आईजीएमसी (IGMC), शिमला में स्थानांतरित करने की बात कही गई है।
यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कामला नेहरू अस्पताल वर्ष 1923 से, ब्रिटिश काल से ही, निरंतर सेवाएँ प्रदान कर रहा है। यह अस्पताल केवल एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि शिमला की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसने लगभग एक शताब्दी से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आईजीएमसी पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ और दबाव में है। वहाँ पर्याप्त जगह और सुविधाओं का अभाव है। यदि केएनएच को वहाँ स्थानांतरित किया जाता है तो:
• मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
• मरीजों को भारी असुविधा और भीड़ का सामना करना पड़ेगा।
• कर्मचारियों की कार्यप्रणाली बाधित होगी और सेवाएँ सुचारू रूप से नहीं चल पाएँगी।
• महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली विशेष स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित होकर रह जाएँगी।
हम सरकार से निवेदन करते हैं कि केएनएच को आईजीएमसी में स्थानांतरित करने के बजाय इसके वर्तमान स्वरूप को और मज़बूत किया जाए, आधुनिक उपकरण लगाए जाएँ और अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति की जाए।
साथ ही, जनहित में यह भी आवश्यक है कि यहाँ एक औषधि विशेषज्ञ (Medicine Specialist) की नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों को और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें।
हम सरकार से दृढ़ अपील करते हैं कि इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए और 1923 से चली आ रही इस ऐतिहासिक धरोहर को स्वतंत्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र के रूप में ही जारी रखा जाए।
मनोज़ शर्मा
अध्यक्ष, स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी महासंघ, शिमला






