एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर सियासत तेज हो गई। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंगलवार को सदन में विपक्षी भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी यह बताए कि वह आरडीजी बंद होने के पक्ष में है या विरोध में। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के सामने भाजपा को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए।
सरकारी संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है।
संघीय ढांचे के तहत विशेष श्रेणी के राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान दिया जाता रहा है और इसे बंद करने से पहले प्रदेश की वित्तीय स्थिति का समुचित आकलन होना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना और समुचित समीक्षा के इसे बंद कर दिया गया, जो प्रदेश के हितों के खिलाफ है।

अग्निहोत्री ने कहा कि यदि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार का साथ नहीं देता तो यह विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा कि संकट की घड़ी में विपक्ष की क्या भूमिका रही।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर तंज कसते हुए कहा कि आरडीजी बंद होने के बाद उन्होंने एक बार भी सार्वजनिक रूप से अफसोस व्यक्त नहीं किया।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की मंशा से आरडीजी बंद किया गया है।
उन्होंने जीएसटी मुआवजे का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय केंद्र से भारी भरकम राशि मिली, लेकिन उसके बावजूद कर्मचारियों के एरियर का भुगतान नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र की ओर से ऐसा कोई पत्र नहीं दिया गया जिसमें स्पष्ट किया गया हो कि अगले वित्त आयोग में आरडीजी समाप्त की जाएगी। एकाएक इसे बंद करने का निर्णय प्रदेश की आर्थिक सेहत के लिए झटका साबित हुआ है।
जयराम ठाकुर पर गंभीर आरोप
मुकेश अग्निहोत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर दिल्ली जाकर प्रदेश के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता रुकवाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश के संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
अग्निहोत्री के अनुसार, प्रदेश की स्वयं की आय लगभग 18 हजार करोड़ रुपये है, जबकि देनदारियां 42 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी हैं।
ऐसे में आरडीजी बंद होना प्रदेश के लिए आर्थिक संकट को और गहरा करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 55 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हिमाचल को उठाना पड़ सकता है।
उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि उनके पास विशेष फंड आवंटन की व्यवस्था है और उन्हें हिमाचल के हित में निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के अस्तित्व का सवाल है।
अंत में अग्निहोत्री ने विपक्ष से अपील की कि सरकार और विपक्ष मिलकर आरडीजी बहाली की दिशा में केंद्र पर दबाव बनाएं।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस), वेतन और पेंशन भुगतान की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करती रहेगी और हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।






