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रामपुर बुशहर में देव मिलन का भव्य आयोजन, देवता “दोगणू” लालसा में गूंजे भक्ति के स्वर, “देवताओं” और “जाईयों” का स्वागत, आज “शिखा फेर”

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एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर
रामपुर बुशहर के लालसा स्थित भगवान परशुराम की पावन स्थली इन दिनों आस्था और श्रद्धा के अनुपम संगम का केंद्र बनी हुई है।

18 फरवरी को जल यात्रा के साथ आरंभ हुए माता मंगला काली एवं देवता दोगणू महाराज की नवनिर्मित कोठी के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के तहत शनिवार को मेहमान देवताओं का भव्य आगमन हुआ। पूरे क्षेत्र में ‘देव मिलन’ की अलौकिक छटा बिखरी नजर आई।
मंदिर कमेटी की अगुवाई में देवता दोगणू महाराज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सभी आमंत्रित देवताओं का माता मंगला काली मंदिर परिसर के बाहर विधिवत स्वागत किया।

ढोल-नगाड़ों की गूंज, रणसिंघा और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनियों के बीच देवता और देवलू नृत्य करते-गाते मंदिर प्रांगण तक पहुंचे। पूरा वातावरण श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव से सराबोर हो उठा। इससे पूर्व जाइयों और भांजों का भी स्नेहपूर्वक अभिनंदन किया गया।
हजारों श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया। कई श्रद्धालु भावनाओं से अभिभूत भी नजर आए।

मंदिर समिति के उपप्रधान मनीष शर्मा ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में भाग लेने वाले सभी देवताओं का स्वागत प्राचीन देव परंपराओं के अनुरूप विधि-विधान से किया गया।
समारोह में चार ठहरी के प्रमुख देवताओं ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

इनमें देवता दमुख डंसा, देवता साहिब जाहरूनाग शनेरी, देवता साहिब यज्ञेश्वर शिंगला, देवता कालेश्वर छिज्जा देवठी, देवता नरेशर लक्ष्मी नारायण कुमसू, देव जाख रचोली, लक्ष्मी नारायण देवता दरकाली, खंटू देवता साहिब सेरी मझाली तथा देवता थेडा महासू प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन सभी देवताओं की सहभागिता से समारोह की शोभा और भी बढ़ गई।
आज होगी शिखा पूजन और ‘फेर’ रस्म
रविवार को नवनिर्मित मंदिर की शिखा पूजन एवं ‘फेर’ रस्म संपन्न होगी। इस दौरान मंदिर की छत पर चारों दिशाओं में विधिवत पूजा-अर्चना कर कलश स्थापना की जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान मंदिर की पूर्णता और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतिष्ठापन का प्रतीक माना जाता है।
सोमवार को समारोह के समापन अवसर पर जाइयों, भांजों और आमंत्रित देवताओं को पारंपरिक विधियों के साथ सम्मानपूर्वक विदाई दी जाएगी।

कई दिनों तक चले इस भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ लालसा की यह ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ देगी।

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