MC शिमला की बैठक में मेयर सुरेन्द्र चौहान ने किया 688 करोड़ का विशाल बजट पेश, विपक्षी भाजपा ने किया बहिष्कार

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एप्पल न्यूज़, शिमला

नगर निगम शिमला की साधारण बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट और वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट को मंजूरी दे दी गई। बैठक में प्रस्तुत बजट के अनुसार आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 688 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बैठक में जानकारी दी गई कि बजट नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 80(1) के तहत तैयार किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए आय के विभिन्न स्रोतों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया, जिसमें नगर निगम की संपत्तियों से होने वाली आय, किराया आय (रेंटल इनकम) और अन्य कर एवं शुल्क शामिल हैं।

किराया आय के रूप में लगभग 4700.20 लाख रुपये प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है।


वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट को भी सदन में विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आय और व्यय के संतुलन को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया गया है, ताकि शहर में विकास कार्यों और जनसुविधाओं को गति दी जा सके।
नगर निगम की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित बजट में आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, सफाई व्यवस्था, पेयजल, सड़कों की मरम्मत तथा अन्य शहरी सेवाओं के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं।

बैठक में उपस्थित पार्षदों ने विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करते हुए सुझाव भी दिए।
बजट पारित होने के साथ ही आगामी वित्त वर्ष में नगर निगम की विकास योजनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

नगर निगम शिमला के बजट में भाजपा पार्षदों का हंगामा, किया बजट का बहिष्कार

नगर निगम शिमला वर्ष 2026-27 के लिए आज वार्षिक बजट पेश कर रहा है, लेकिन बजट से ठीक पहले नगर निगम सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। भाजपा पार्षदों ने मेयर के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए बजट का बहिष्कार कर दिया।

भाजपा पार्षदों का आरोप है कि मेयर का ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है और कार्यकाल बढ़ाने से संबंधित एक्ट अभी कानून का रूप नहीं ले पाया है।

उनका कहना है कि इस प्रस्ताव पर राज्यपाल की स्वीकृति नहीं मिली है और मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में मौजूदा मेयर द्वारा बजट पेश करना पूरी तरह से अवैध है। पार्षदों ने कहा कि जब कार्यकाल ही समाप्त हो चुका है तो मेयर किस अधिकार से बजट प्रस्तुत कर रहे हैं।

उन्होंने इसे नगर निगम शिमला और प्रदेश सरकार की “दादागिरी” करार दिया। भाजपा पार्षदों ने विरोधस्वरूप सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और बजट प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

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