हिमाचल में थर्ड फ्रंट पर सियासत गर्म, अब घुमारवी में बैठक, “जो जाना चाहता है, जा सकता है, किसी को रोक नहीं सकते”-CM सुक्खू

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एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों तीसरे मोर्चे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर जहां प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं को लेकर अलग-अलग स्तर पर गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इसी बीच घुमारवीं में हुई एक गुप्त बैठक ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार Ram Lal Markandeya ने घुमारवीं के एक निजी होटल में कुछ स्थानीय नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की।

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों, आगामी विधानसभा चुनावों और प्रदेश में तीसरे राजनीतिक मोर्चे की संभावनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

हालांकि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया, लेकिन इसकी खबर सामने आने के बाद शहर और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि Ram Lal Markandeya इन दिनों हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं।

उनका उद्देश्य प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं को तलाशना और ऐसे नेताओं को साथ जोड़ना है जो एक नए राजनीतिक मंच के साथ आगे आना चाहते हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार वह प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की तलाश में जुटे हुए हैं। इसी रणनीति के तहत वे अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों से मुलाकात कर रहे हैं।
घुमारवीं में हुई बैठक को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति और संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी मंथन किया गया। हालांकि बैठक को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन शहर में इस गुप्त बैठक को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि बंद कमरे में किन नेताओं से मुलाकात हुई और प्रदेश में तीसरे विकल्प को लेकर आगे क्या रणनीति बन सकती है।
उधर, तीसरे मोर्चे की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। नादौन में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जो नेता जाना चाहता है, वह जा सकता है और किसी को जबरदस्ती रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी पार्टी बनाने और राजनीतिक निर्णय लेने का अधिकार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का मुख्य ध्यान प्रदेश के विकास और जनहित के कार्यों पर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उनकी सरकार के अभी दो वर्ष और शेष हैं और इस दौरान विकास कार्यों को और गति दी जाएगी तथा जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने Bharatiya Janata Party पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि भाजपा आरडीजी (RDG) ग्रांट बंद होने के मुद्दे पर चुप क्यों है।

मुख्यमंत्री के अनुसार यह ग्रांट हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से मिलती रही है, लेकिन इसके बंद होने से प्रदेश को हर साल लगभग 8 से 10 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के हितों से जुड़ा गंभीर विषय है और इस पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार जनहित के कार्यों को लगातार आगे बढ़ाती रहेगी और प्रदेश के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

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