एप्पल न्यूज़, नौणी /सोलन
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा ने आज कुलपति का कार्यभार संभाल लिया। एक प्रख्यात फ्लोरीकल्चर वैज्ञानिक के रूप में डॉ. बवेजा के पास शिक्षण, अनुसंधान, प्रशासन और प्रसार कार्यों का 36 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है।
डॉ. बवेजा इससे पहले हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक, हिमाचल प्रदेश के बागवानी निदेशक तथा उत्तराखंड के बागवानी निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे विश्वविद्यालय में फ्लोरीकल्चर विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत रहे हैं।
एक सफल शिक्षाविद एवं प्रशासक के रूप में उन्होंने अनेक स्नातकोत्तर और पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। उनके द्वारा कई शोध पत्र और पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं तथा पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण और कौशल विकास पहलों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। डॉ. बवेजा ने एफएओ सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और यूरोप व यूएई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन दौरों में भी भाग लिया है।

उन्होंने बागवानी अवसंरचना, कृषि विपणन और नीतिगत क्रियान्वयन को मजबूत करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। उनके कार्यकाल के दौरान कृषि विपणन अवसंरचना के लिए विश्व बैंक समर्थित परियोजनाओं के तहत लगभग 150 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि उत्तराखंड में 8500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का सफल संचालन किया गया।
डॉ. बवेजा को ई-नाम क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री पुरस्कार तथा एशिया पैसिफिक एक्सीलेंस अवार्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, नवाचार आधारित और वित्तीय रूप से सुदृढ़ संस्थान के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही उद्योगों से मजबूत जुड़ाव और किसानोन्मुखी विस्तार कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की बात कही।
विश्वविद्यालय पहुंचने पर संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. बवेजा ने कविंदर गुप्ता, सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय के माध्यम से कृषि एवं बागवानी समुदाय की सेवा करने का अवसर मिला है।
कार्यभार संभालने के बाद डॉ. बवेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय की सभी पहलों को उनकी पूर्ण क्षमता तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के विकास में योगदान देने वाले कुशल स्नातकों को तैयार करने, पूर्व छात्रों (एलुमनाई) के साथ सहयोग बढ़ाने तथा विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए बेहतर अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया।








