एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेट्रोल-डीज़ल पर ‘विधवा और अनाथ सेस’ से जुड़ा संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया।
सरकार ने ‘मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम 2005’ में संशोधन करते हुए इस बिल को मंजूरी दी, हालांकि विपक्ष ने इसका जोरदार विरोध किया।
विपक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बिल वापस लेने की मांग की, लेकिन सरकार अपने निर्णय पर कायम रही।
विपक्ष का आरोप है कि इस नए सेस से प्रदेश में महंगाई बढ़ेगी और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उनका कहना है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा से अधिक हो सकती हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर खाद्य वस्तुओं सहित रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ेगा।
विपक्ष ने ‘विधवा और अनाथ’ शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार इन संवेदनशील वर्गों के नाम पर टैक्स लगाकर जनता पर बोझ डाल रही है।
उनका यह भी कहना है कि इससे किसानों, आम लोगों और हिमाचल आने वाले पर्यटकों पर भी असर पड़ेगा।
वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के कमजोर तबकों को सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार विधवाओं और अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए कदम उठा रही है तो इसका विरोध करना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले से ही पेट्रोल-डीज़ल पर लगभग 27 रुपए का सेस वसूल रही है, जबकि हिमाचल में प्रस्तावित सेस के बावजूद कीमतें पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रहेंगी।
सरकार का दावा है कि इस सेस से प्राप्त पूरी राशि ‘अनाथ एवं विधवा वेलफेयर फंड’ में जमा की जाएगी और इसका उपयोग सीधे जरूरतमंदों की सहायता तथा कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार में किया जाएगा।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया। उन्होंने बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र से अंडरग्रेजुएट कक्षाओं में सेमिस्टर सिस्टम लागू किया जाएगा।
वहीं बाहरी राज्यों की गाड़ियों पर बढ़ाए गए एंट्री टैक्स को लेकर सरकार पुनर्विचार कर रही है। इस विषय पर कैबिनेट में चर्चा हो चुकी है और जल्द ही कोई संतुलित समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया है।





