एप्पल न्यूज़, शिमला
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से जुड़े मामलों में नई सख्ती बरतते हुए स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज करवाए बिना सीधे अदालत का रुख करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने 16 मई 2026 को कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया है।
सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के तबादलों को विनियमित करने के लिए लागू व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (Comprehensive Guiding Principles-2013) में पहले से ही शिकायत निवारण संबंधी प्रावधान शामिल हैं।

इसके तहत फरवरी 2025 में पैरा 22A जोड़ा गया था, जिसमें कर्मचारियों को पहले सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ कर्मचारी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और सीधे न्यायालयों का रुख कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अदालतों द्वारा अंतरिम राहत अथवा स्टे ऑर्डर दिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अब नियमों में और कड़ाई करने का निर्णय लिया है।
नए संशोधन के अनुसार यदि कोई कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करता है या बिना सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत रखे सीधे अदालत पहुंचता है, तो इसे सरकारी निर्देशों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 तथा अन्य लागू नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव निराज कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस प्रकार के उल्लंघन को कदाचार माना जाएगा और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को इस निर्णय की जानकारी देने के निर्देश जारी किए हैं।
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक अनुशासन मजबूत करने और तबादला मामलों में अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






