एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के विरुद्ध धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस थाना सदर शिमला में 22 अक्टूबर 2026 को अभियोग संख्या 138/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 316(5), 314, 318, 336 और 340 में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उन्हें सरकारी कार्यों एवं व्यवस्थाओं से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इन कार्यों को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च करने और बाद में भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने संबंधित व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए और इसके बिल कार्यालय में जमा करवाए। कार्यालय की ओर से जांच के बाद इन बिलों को भुगतान के लिए स्वीकृति भी दे दी गई थी।

भुगतान के नाम पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने उन्हें अपने पास बुलाया और भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। उन्हें बताया गया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर आवश्यक हैं और स्वीकृत राशि उन्हें मिल जाएगी। हालांकि, शिकायत के अनुसार, हस्ताक्षर करने के बावजूद उन्हें राशि का भुगतान नहीं किया गया।
जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद कांस्टेबल ने कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से संबंधित भुगतान की जानकारी हासिल की। इस दौरान उन्हें कथित तौर पर पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके खाते में जमा नहीं हुई। इसके चलते उन्हें अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से धन की व्यवस्था करनी पड़ी।
दो वर्षों में 2.35 लाख रुपये की कथित अनियमितता
शिकायत मिलने के बाद संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जिला पुलिस के एक फंड से लगभग दो वर्षों के दौरान कुल 2,35,000 रुपये की कथित अवैध निकासी की गई थी। आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। इससे संबंधित फंड में धन की कमी होने की बात सामने आई।
रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में स्थानांतरण होने के दौरान फंड में कथित कमी को पूरा करने के लिए शिकायतकर्ता के बिलों की स्वीकृत राशि का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि शिकायतकर्ता को भुगतान करने के बजाय यह राशि संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। परिणामस्वरूप, कांस्टेबल को उनकी स्वीकृत राशि नहीं मिल सकी।
वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर प्राथमिकी
प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताओं से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी में जालसाजी और दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
पुलिस थाना सदर शिमला में दर्ज इस मामले की जांच जारी है। आरोपों की सत्यता और संबंधित धनराशि के वास्तविक इस्तेमाल का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगा।



