एप्पल न्यूज़, रिकांगपिओ
कैंसर के मरीजों को दवाओं की कीमतों में राहत मिलने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी एवं हिमाचल प्रदेश वन निगम के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने कैंसर की दवाओं की कीमतों में कटौती के निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आभार जताया है।
सूरत नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का उपचार करा रहे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर की 543 दवा ब्रांडों की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतों की सूची जारी की है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। औषध विभाग की ओर से कैंसर की 137 दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करने की पहल भी की गई है।

उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार पर भारी खर्च के कारण कई परिवारों को अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खर्च करनी पड़ती है। दवाओं की कीमतों में कमी से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को विशेष राहत मिलेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पाल्बोसिक्लिब 125 एमजी के एक ब्रांड के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत लगभग 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये निर्धारित की गई है। उनके अनुसार, कुछ दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी हुई है।
किन्नौर के मरीजों को भी मिलेगा लाभ
सूरत नेगी ने कहा कि किन्नौर जैसे दुर्गम जनजातीय क्षेत्र के कैंसर मरीजों को उपचार के लिए शिमला, चंडीगढ़ और अन्य बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिजनों का आर्थिक बोझ कम होगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से किन्नौर में कैंसर की शुरुआती जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, नियमित स्वास्थ्य शिविर और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 320 अतिरिक्त स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों तथा करीब 415 करोड़ रुपये की सहायता से संबंधित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने प्रदेश सरकार से केंद्र द्वारा स्वीकृत स्वास्थ्य परियोजनाओं और आपदा पुनर्निर्माण सहायता के उपयोग का पारदर्शी ब्योरा देने को भी कहा।
सूरत नेगी ने कहा कि दवाओं की संशोधित कीमतों का लाभ प्रत्येक पात्र मरीज तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक स्थिति किसी के उपचार में बाधा न बने।



