एप्पल न्यूज़, शिमला
Himachal Pradesh High Court की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दूसरे राज्यों से विवाह कर हिमाचल प्रदेश में बसने वाली ओबीसी और एससी वर्ग की महिलाओं को राज्य में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही उनकी जाति उनके गृह राज्य और हिमाचल दोनों में आरक्षित श्रेणी में शामिल हो।
मुख्य न्यायाधीश Gurmeet Singh Sandhawalia और न्यायाधीश Bipin Chander Negi की खंडपीठ ने कहा कि Supreme Court of India के स्थापित कानून के अनुसार विवाह के बाद किसी अन्य राज्य में बसने वाले व्यक्ति को उस राज्य की आरक्षण सुविधाओं का लाभ नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने जसवंत कौर सहित चार महिलाओं की अपीलें खारिज करते हुए राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया। अपीलकर्ताओं में पंजाब की सैनी (ओबीसी) समुदाय से संबंधित दो महिलाएं तथा हरियाणा की वाल्मीकि (एससी) समुदाय से संबंधित एक महिला शामिल थीं। इन सभी ने हिमाचल के समान जाति वर्ग के पुरुषों से विवाह किया था और उन्हें हिमाचल का बोनाफाइड प्रमाणपत्र भी जारी किया गया था।
महिलाओं ने तर्क दिया था कि उनकी जातियां हिमाचल में भी आरक्षित वर्ग में शामिल हैं, इसलिए उन्हें सरकारी नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि राज्य सरकार ने यह कहते हुए दावा अस्वीकार कर दिया कि उनका जन्म हिमाचल प्रदेश में नहीं हुआ है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों से बाध्य है। अदालत ने उस मामले का भी उल्लेख किया जिसमें पंजाब की वाल्मीकि समुदाय की एक महिला ने उत्तराखंड में विवाह किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे उत्तराखंड में अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ देने से इंकार कर दिया था।
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि केवल विवाह और स्थायी निवास प्रमाणपत्र के आधार पर किसी अन्य राज्य से आई महिला हिमाचल प्रदेश में एससी या ओबीसी आरक्षण का दावा नहीं कर सकती।






