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आउटसोर्स भर्तियों पर हिमाचल हाई कोर्ट की रोक, भर्ती नियमों के विपरीत नहीं होगी कोई नियुक्ति, अब तक हुई हैं 17,114 भर्तियाँ

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एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश में आउटसोर्स आधार पर की जा रही भर्तियों पर सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार और उसके अधीन उपक्रमों में कोई भी नियुक्ति निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (आर एंड पी रूल्स) के विपरीत नहीं की जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को दरकिनार कर आउटसोर्स नियुक्तियां करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग में पहले कर्मचारियों को आउटसोर्स आधार पर नियुक्त किया जाता है और बाद में उन्हें रोगी कल्याण समितियों में समाहित कर दिया जाता है। अदालत ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिकारियों ने आउटसोर्स भर्तियों के जरिए एक “गुप्त मार्ग” तैयार कर लिया है, जिसका इस्तेमाल अज्ञात उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।


राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उसके पास प्रदेश सरकार और उससे जुड़े विभिन्न संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस पर अदालत ने स्वास्थ्य सचिव और वित्त सचिव को स्पष्टीकरण देने के लिए न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए।
खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार धन बचाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं का शोषण नहीं कर सकती। रिक्त पद उपलब्ध होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया नहीं अपनाना और बड़ी संख्या में लोगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त करना उनके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत ने यह भी कहा कि उसे उन रिक्त पदों के प्रतिशत की जानकारी नहीं दी जा रही है, जिनके विरुद्ध आउटसोर्स नियुक्तियां की गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 17,114 व्यक्तियों की नियुक्ति आउटसोर्स आधार पर की जा चुकी है।
विभागवार आउटसोर्स नियुक्तियां
42 संस्थानों, जिनमें उच्च न्यायालय और हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी शामिल हैं, में बड़ी संख्या में नियुक्तियां।
पुलिस महानिदेशक कार्यालय में 630 कर्मचारी।
जल शक्ति विभाग में 542 कर्मचारी।
हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में 1,473 कर्मचारी।
ग्रामीण विकास विभाग में 632 कर्मचारी।
कृषि निदेशालय में 803 कर्मचारी।
चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में 793 कर्मचारी।
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय में 2,578 कर्मचारी।
मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत के आगामी आदेशों पर प्रदेश की आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था और हजारों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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