एप्पल न्यूज़, शिमला/कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री, शाहपुर के पूर्व विधायक और पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह कांगड़ा जिले के उनके पैतृक गांव त्यारा में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से प्रदेश में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां सहित विभिन्न नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास और जनकल्याण के लिए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के कल्याण और लोगों की सेवा के लिए मेजर मनकोटिया द्वारा किए गए कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे। उन्होंने परमपिता परमात्मा से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक-संतप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने भी पूर्व विधायक एवं मंत्री विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर गहरा दु:ख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने एक होनहार, कर्तव्यनिष्ठ और कद्दावर नेता खो दिया है, जिसकी भरपाई करना कठिन है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक-संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

सेना में भी रहा गौरवपूर्ण सफर
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का जन्म 23 नवंबर, 1939 को कांगड़ा जिले के गांव त्यारा में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1960 में देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में प्रवेश लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। वर्ष 1962 में उन्हें भारतीय सेना की प्रथम गोरखा राइफल में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला।
उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए देश की महत्वपूर्ण सैन्य घटनाओं में सेवाएं दीं। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध तथा 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग लिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने करीब चार वर्षों तक भूटान में रॉयल भूटान आर्मी के साथ भी सेवाएं प्रदान कीं। वर्ष 1976 में उन्होंने भारतीय सेना से समयपूर्व सेवानिवृत्ति ली।
शाहपुर से पांच बार रहे विधायक
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वे वर्ष 1982, 1985, 1990, 1993 और 2003 में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। इस तरह उन्होंने शाहपुर का पांच बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया।
मेजर मनकोटिया ने प्रदेश सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने 1995 से 1998 तक तथा मार्च 2003 से जुलाई 2004 तक पर्यटन, नागरिक उड्डयन एवं विधि मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। मंत्री के रूप में उन्होंने पर्यटन और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रदेश के विकास कार्यों में योगदान दिया।
मिलनसार व्यक्तित्व के लिए थे लोकप्रिय
विधानसभा अध्यक्ष पठानियां ने कहा कि मेजर विजय सिंह मनकोटिया का व्यक्तित्व मिलनसार था और वे लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनकी विशेषता थी कि वे राजनीति, प्रशासन और समाज सेवा के बीच संतुलन बनाए रखते थे। लंबे सैन्य और राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन को हिमाचल प्रदेश के सार्वजनिक जीवन के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। सैन्य सेवा, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।



