रह जाता कोई अर्थ नहीं

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♨ *।। कोई अर्थ नहीं।।* ♨
नित जीवन के संघर्षों से
जब टूट चुका हो अन्तर्मन,
तब सुख के मिले समन्दर का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं*।।

जब फसल सूख कर जल के बिन
तिनका -तिनका बन गिर जाये,
फिर होने वाली वर्षा का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन
यदि दुःख में साथ न दें अपना,
फिर सुख में उन सम्बन्धों का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

छोटी-छोटी खुशियों के क्षण
निकले जाते हैं रोज़ जहाँ,
फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

मन कटुवाणी से आहत हो
भीतर तक छलनी हो जाये,
फिर बाद कहे प्रिय वचनों का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

सुख-साधन चाहे जितने हों
पर काया रोगों का घर हो,
फिर उन अगनित सुविधाओं का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

 

सुमति शर्मा

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