IMG_20260124_200231
previous arrow
next arrow

CBSE स्कूलों का स्वागत लेकिन शिक्षकों का “टेस्ट न लें”, स्कूलों को मर्ज न करें, HGTU ने CM को भेजा ज्ञापन

IMG_20251207_105330
previous arrow
next arrow

एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में CBSE बोर्ड लागू करने के सरकार के फैसले को लेकर अब शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। हिमाचल गवर्नमेंट टीचर यूनियन (HGTU) ने इस कदम का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपने सुझाव और चिंताएं साझा की हैं।

यूनियन का कहना है कि यदि इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया गया, तो CBSE बोर्ड को लागू करने की प्रक्रिया सुचारू और शिक्षकों के हित में होगी।
पत्र में यूनियन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के शिक्षक CBSE बोर्ड लागू करने के पक्ष में हैं, लेकिन इसके साथ कुछ व्यावहारिक पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

यूनियन के अनुसार, लंबे समय से सेवा दे रहे योग्य और अनुभवी शिक्षकों की दक्षता जांचने के लिए किसी भी प्रकार की नई परीक्षा या टेस्ट नहीं लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि वर्षों का अनुभव अपने आप में शिक्षक की योग्यता का प्रमाण है।
इसके अलावा, यूनियन ने मांग की है कि जिन शिक्षकों को पहले से CBSE स्कूलों में सेवाएं देने का अवसर मिला है, उन्हें कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाए, ताकि वे CBSE बोर्ड के परीक्षा पैटर्न और शैक्षणिक ढांचे के अनुसार अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें। इससे शिक्षकों पर अचानक दबाव नहीं पड़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
शिक्षक यूनियन ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की दक्षता का मूल्यांकन छात्रों के परिणामों के आधार पर किया जाए। साथ ही, प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को शत-प्रतिशत भरा जाना चाहिए, ताकि CBSE पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
पत्र में एक अहम मांग यह भी रखी गई है कि HP Board और CBSE स्कूलों के बीच इंटर-बोर्ड ट्रांसफर की सुविधा शिक्षकों की इच्छा के अनुसार जारी रखी जाए। इससे शिक्षकों को स्थानांतरण को लेकर अनावश्यक परेशानी नहीं होगी। वहीं, लड़कों और लड़कियों के अलग-अलग स्कूलों को मर्ज न करने की सलाह दी गई है। यूनियन का कहना है कि स्कूलों के विलय के बजाय उन्हें अलग-अलग मजबूत किया जाना चाहिए, चाहे वे CBSE से जुड़े हों या HP Board से।
पदोन्नति व्यवस्था को लेकर भी यूनियन ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि CBSE बोर्ड लागू होने से शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की प्रमोशन चैनल प्रभावित नहीं होनी चाहिए। हालांकि, CBSE मानकों के अनुसार उप-प्रधानाचार्य (Vice-Principal) का एक पद सृजित किया जा सकता है।
इसके अलावा, यूनियन ने यह भी स्पष्ट किया है कि CBSE और HP Board दोनों की फीस संरचना में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए। साथ ही, शिक्षा विभाग में किसी भी रूप में निजीकरण को शिक्षक यूनियन ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
अंत में, हिमाचल गवर्नमेंट टीचर यूनियन ने उम्मीद जताई है कि सरकार इन सुझावों पर सकारात्मक विचार करेगी। यूनियन का मानना है कि इससे न केवल CBSE बोर्ड का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से हो पाएगा, बल्कि सरकार और शिक्षकों के बीच विश्वास और सहयोग भी मजबूत होगा।

यूनियन के मुख्य सुझाव (Points)
अनुभवी और योग्य शिक्षकों के लिए कोई नई परीक्षा न ली जाए
CBSE स्कूलों में पोस्टिंग के लिए लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की दक्षता जांचने के लिए अलग टेस्ट न हो।
CBSE स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों को कम से कम 1 साल का समय मिले
ताकि वे CBSE बोर्ड पैटर्न के अनुसार अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें।
प्रधानाचार्य व शिक्षकों की दक्षता छात्रों के रिज़ल्ट के आधार पर आंकी जाए
साथ ही सभी खाली पदों को 100% भरा जाए।
इंटर-बोर्ड ट्रांसफर की सुविधा जारी रखी जाए
शिक्षकों की इच्छा के अनुसार HP Board और CBSE स्कूलों के बीच स्थानांतरण संभव रहे।
लड़कों और लड़कियों के स्कूलों का विलय न किया जाए
बल्कि दोनों को अलग-अलग मजबूत किया जाए—चाहे CBSE हो या HP Board।
पदोन्नति (Promotion) व्यवस्था प्रभावित न हो
CBSE नियमों के अनुसार Vice-Principal का पद सृजित किया जाए, लेकिन मौजूदा प्रमोशन चैनल सुरक्षित रहे।
CBSE और HP Board की फीस में बढ़ोतरी न की जाए
शिक्षा विभाग में किसी भी प्रकार के निजीकरण को यूनियन अस्वीकार्य मानती है

Share from A4appleNews:

You May Like

Breaking News