एप्पल न्यूज, शिमला
शिमला/बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी आत्महत्या मामले में अब हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन, विशेषकर शिमला के पुलिस अधीक्षक (SP), को कड़ी फटकार लगाई है।
अदालत की इस सख्ती के बाद अफसरशाही में हलचल मच गई है और मामले की कई नई परतें सामने आने लगी हैं।
विमल नेगी, जो पावर कारपोरेशन में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, ने कुछ समय पहले बिलासपुर में आत्महत्या कर ली थी।

इस दुखद घटना ने न सिर्फ विभाग को झकझोर कर रख दिया, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए।
परिजनों ने मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी और आरोप लगाया था कि विमल नेगी मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जा रहे थे।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने SP शिमला की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत ने कहा कि जांच में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पुलिस की निष्क्रियता या पक्षपातपूर्ण रवैये को अदालत गंभीरता से लेगी।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस प्रगति क्यों नहीं हुई।
प्रशासन कटघरे में
इस फटकार के बाद राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ गया है। अब तक जिन बातों को नजरअंदाज किया जा रहा था, वे एक-एक कर सामने आ रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
परिवार और आम जनता की मांग
विमल नेगी के परिजन लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि एक अधिकारी को संस्थागत दबाव में धकेलने का मामला है।
सोशल मीडिया और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले की निष्पक्ष और सीबीआई स्तर की जांच की मांग उठाई है।
सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम को अब राजनीतिक रंग भी मिल गया है। विपक्ष ने सरकार पर पुलिस प्रशासन को “राजनीतिक हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
वहीं सत्तारूढ़ दल ने कहा है कि “कोर्ट की हर टिप्पणी का सम्मान है और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”






