एप्पल न्यूज़, शिमला
कांग्रेस विधायक एवं वरिष्ठ नेता राजेश धर्माणी ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए भाजपा पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सियासत करने से किसी भी प्रकार का समाधान नहीं निकलने वाला, बल्कि इससे प्रदेश की आर्थिक चिंताएं और बढ़ेंगी।
धर्माणी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी को अचानक बंद करना हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर “सर्जिकल स्ट्राइक” जैसा है।
उनका कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी और सीमित संसाधनों वाले राज्य को क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था, ताकि वह धीरे-धीरे इस अनुदान पर निर्भरता कम कर पाता।

लेकिन बिना किसी संक्रमणकाल के लिए गए इस फैसले से राज्य पर भारी आर्थिक दबाव पड़ना तय है।
उन्होंने चेताया कि आरडीजी बंद होने का सीधा असर कर्मचारियों की देनदारियों, विकास कार्यों और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है।
ऐसे में जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर सभी स्टेकहोल्डर्स—राज्य सरकार, केंद्र सरकार, कर्मचारी संगठन और अन्य वर्ग—एक मंच पर आएं और प्रदेश के हित में सामूहिक समाधान तलाशें।
राजेश धर्माणी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा कर्मचारी यूनियनों से बातचीत की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम सकारात्मक और सही दिशा में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) में जाने जैसे किसी भी बड़े निर्णय पर सभी संबंधित पक्षों की राय लेकर ही आगे बढ़ा जाएगा।
धर्माणी ने दोहराया कि हिमाचल के आर्थिक हित सर्वोपरि हैं और इसके लिए सहयोगात्मक सोच व साझा प्रयास ही एकमात्र रास्ता है।







