एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर सियासी टकराव के बीच हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होते ही सदन का माहौल गरमा गया।
राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सत्तापक्ष ने नियम 102 के तहत RDG पर सरकारी संकल्प पेश कर चर्चा शुरू करवा दी, जिस पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।
क्या है RDG और क्यों है विवाद?
राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) वह वित्तीय सहायता है जो केंद्र सरकार विशेष श्रेणी वाले राज्यों को उनके राजस्व घाटे की भरपाई के लिए देती है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह अनुदान वित्तीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। RDG में कटौती या बंद होने की आशंका से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर संकट की चर्चा तेज हो गई है।
विपक्ष का आरोप: परंपराएं तोड़ी गईं, केंद्र ने दिया भरपूर सहयोग
चर्चा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर संसदीय परंपराओं को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और चर्चा के बाद ही अन्य संकल्प लाए जाने चाहिए थे।
उन्होंने दावा किया कि:
नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल को ऐतिहासिक वित्तीय सहयोग मिला।
यूपीए सरकार के दो कार्यकाल में जहां लगभग 18 हजार करोड़ रुपये RDG मिला, वहीं मोदी सरकार में 78 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान दिया गया।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य का अंशदान 10% किया गया।
रेलवे, नेशनल हाईवे, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र ने व्यापक सहयोग दिया।
जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर अव्यवस्था फैलाने और हर आर्थिक चुनौती के लिए केंद्र व पूर्व सरकारों को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया।
सरकार का जवाब: RDG बहाली के लिए साथ आए विपक्ष
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:
भाजपा सरकार के पांच वर्षों में 54 हजार करोड़ RDG मिला, जबकि मौजूदा सरकार को तीन साल में केवल 17 हजार करोड़ रुपये मिले।
सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन बेहतर रखा है।
OPS (पुरानी पेंशन योजना) बंद नहीं होगी।
बिजली बोर्ड का निजीकरण नहीं होगा, बल्कि उसे मजबूत किया जाएगा।
हिमकेयर और अन्य सामाजिक योजनाएं जारी रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेद भुलाकर प्रधानमंत्री से RDG बहाली की मांग के लिए संयुक्त रूप से दिल्ली चलें।
सदन में मुख्य टकराव के मुद्दे
संसदीय परंपराएं बनाम तात्कालिक चर्चा
केंद्र से वित्तीय सहयोग के आंकड़ों की व्याख्या
राज्य की आर्थिक बदहाली के लिए जिम्मेदारी तय करना
कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता
RDG को लेकर हिमाचल की राजनीति निर्णायक मोड़ पर है। एक ओर विपक्ष केंद्र के सहयोग को पर्याप्त बताकर राज्य सरकार को वित्तीय कुप्रबंधन के लिए दोषी ठहरा रहा है, वहीं सत्तापक्ष RDG में कमी को प्रदेश के आर्थिक दबाव का मुख्य कारण बता रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा या केंद्र और राज्य के बीच किसी ठोस समाधान की दिशा में पहल होगी।







